लखनऊ, 30 मार्च 2026:
यूपी में फॉरेंसिक शिक्षा को नई दिशा देने के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) जल्द ही चार प्रमुख संस्थानों के साथ एमओयू साइन करेगा। इससे छात्रों को आधुनिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सकेगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में दक्ष फॉरेंसिक विशेषज्ञ बनाना है।
यह एमओयू महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी, गांधीनगर, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के साथ किया जाएगा। इन संस्थानों के सहयोग से यूपीएसआईएफएस के छात्रों को इंटर्नशिप, रिसर्च और केस स्टडी के व्यापक अवसर मिलेंगे।
यूपीएसआईएफएस के डायरेक्टर डॉ. जीके गोस्वामी के अनुसार सीएम योगी का फोकस छात्रों को जॉब रेडी बनाना है। इसी के तहत फॉरेंसिक शिक्षा में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। केजीएमयू के साथ समझौते के तहत छात्र फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझ सकेंगे। इसमें पंचनामा से लेकर मौत के कारणों के वैज्ञानिक विश्लेषण तक की जानकारी शामिल होगी।
वहीं, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के साथ एमओयू से छात्रों को जेलों में जाकर बंदियों के मामलों की केस स्टडी करने का अवसर मिलेगा। इससे वे अपराध के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को समझ सकेंगे। यह एक सफल फॉरेंसिक विशेषज्ञ के लिए बेहद जरूरी है।
महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ सहयोग से छात्रों को इंटर्नशिप के अवसर मिलेंगे और भविष्य में एक संयुक्त अत्याधुनिक फॉरेंसिक लैब स्थापित की जाएगी। वहीं, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के साथ छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम से राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान का आदान-प्रदान होगा।
इस पहल के तहत फैकल्टी मेंबर्स भी एक-दूसरे के संस्थानों में जाकर लेक्चर देंगे जिससे शिक्षण गुणवत्ता में सुधार होगा। डिजिटल क्राइम, साइबर फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों की वैज्ञानिक जांच में यह पहल अहम भूमिका निभाएगी। योगी सरकार का यह कदम राज्य में फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ ही छात्रों के भविष्य को भी नई ऊंचाई देगा।






