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अप्रैल में महंगाई का इंजेक्शन : 900 से ज्यादा दवाओं के दाम बढ़े…फार्मा कंपनियों की रूटीन बढ़ोतरी

मरीजों की जेब पर सीधा असर, बाजार में 80 फीसदी नया स्टॉक नई कीमतों के साथ पहुंचा, एमआरपी बदली, 10 से 12 फीसदी तक इजाफा

न्यूज डेस्क, 1 अप्रैल 2026:

आवश्यक दवाओं की कीमतों में बुधवार से बढ़ोतरी लागू हो गई है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के आदेश के बाद 900 से ज्यादा दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में संशोधन किया गया है। अब मरीजों और तीमारदारों को बुखार, दर्द, संक्रमण, एनीमिया और पोषण से जुड़ी दवाएं करीब 10 फीसदी महंगी दर पर मिलेंगी।

दवा बाजार में पहले से ही नई कीमतों का असर दिखने लगा था। जनवरी से ही कई फार्मा कंपनियों ने नए बैच की दवाओं पर बढ़ी हुई एमआरपी डालकर सप्लाई शुरू कर दी थी। अब एक अप्रैल से यह बढ़ोतरी पूरी तरह लागू हो गई है और थोक से लेकर रिटेल तक नई दरों पर बिक्री हो रही है।

कारोबारियों के मुताबिक यह बढ़ोतरी हर साल की तरह रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय हालात या किसी युद्ध का इससे सीधा संबंध नहीं है। अप्रैल के महीने में कंपनियां लागत और अन्य फैक्टर्स के आधार पर कीमतों में संशोधन करती हैं।

बाजार में करीब 80 फीसदी दवाएं अब नए स्टॉक के रूप में पहुंच चुकी हैं। उदाहरण के तौर पर 80 रुपये वाली दवा अब 90 से 95 रुपये तक मिल रही है, जबकि 100 रुपये की दवा 110 से 115 रुपये के बीच बिक रही है। पुराना स्टॉक अभी कुछ दुकानों पर उपलब्ध है, जिसे पुरानी कीमत पर बेचा जा रहा है, लेकिन इसकी हिस्सेदारी लगातार घट रही है।

थोक दवा कारोबारियों का कहना है कि आने वाले एक हफ्ते में लगभग पूरा बाजार नए स्टॉक पर शिफ्ट हो जाएगा। कई कंपनियों की सप्लाई अप्रैल के पहले हफ्ते में पूरी तरह अपडेट हो जाएगी और उसी के हिसाब से बिक्री जारी रहेगी। महंगी होने वाली दवाओं में पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, विटामिन, मिनरल सप्लीमेंट्स, एनीमिया की दवाएं, दर्द निवारक, शुगर, ब्लड प्रेशर की दवाएं, लिवर व पेट और त्वचा रोगों की दवाएं शामिल हैं।

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