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असम में योगी का कांग्रेस-UDF पर वार, कहा… घुसपैठियों को पनाह देकर राज्य का माहौल बिगाड़ा

बरपेटा व बारछला विधानसभा क्षेत्र में एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में हुई जनसभा, डेमोग्राफी बदलने और जमीन कब्जाने के आरोप लगाए

लखनऊ/असम, 3 अप्रैल 2026:

असम विधानसभा चुनाव के प्रचार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा बरपेटा व बरछला में जनसभा कर कांग्रेस और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इन दलों ने घुसपैठियों और दंगाइयों को पनाह दी, जिससे राज्य का माहौल बिगड़ा।

योगी को सुनने के लिए बरपेटा व बरछला विधानसभा में भारी भीड़ जुटी। सीएम ने असमिया भाषा मे कर अपने संबोधन की शुरुआत की। मंच पर एनडीए उम्मीदवारों के साथ योगी ने सभा में जोश भर दिया। अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और यूडीएफ ने असम की संस्कृति के साथ खिलवाड़ किया और घुसपैठ कराकर राज्य की आबादी का संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों की जमीन और मकानों पर कब्जा कराने की साजिश रची गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में चल रही सरकार विकास और विरासत दोनों को आगे बढ़ा रही है। साथ ही घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर करने की प्रक्रिया भी चल रही है। उन्होंने आगे कहा कि एनडीए का संकल्प है कि असम को लैंड जिहाद और लव जिहाद की जमीन नहीं बनने दिया जाएगा। घुसपैठ पूरी तरह रोकी जाएगी और विपक्ष की साजिशें कामयाब नहीं होने दी जाएंगी।

भाषण में योगी ने अयोध्या के राम मंदिर का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे, लेकिन अब भव्य मंदिर बन चुका है। यूपी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां पिछले वर्षों में दंगे नहीं हुए और कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। अगर कोई दंगा करता है तो उसकी संपत्ति जब्त कर गरीबों में बांटने की कार्रवाई की जाती है।

योगी ने कांग्रेस पर भारत और भारतीयता का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी मौका मिला, इन दलों ने देश के हितों के खिलाफ काम किया। उन्होंने यूडीएफ को घुसपैठ की जड़ बताया और कहा कि यह गठबंधन सत्ता पाने के लिए असम की पहचान से समझौता कर रहा है। सभा के अंत में उन्होंने असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जिक्र किया और कहा कि यह प्रदेश पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार है, जहां की परंपरा और पहचान को सुरक्षित रखना जरूरी है।

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