बिजनेस डेस्क, 4 अप्रैल 2026:
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है। HSBC की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगर क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो देश में खुदरा महंगाई 6 फीसदी के पार जा सकती है। यह स्तर रिजर्व बैंक के तय दायरे की ऊपरी सीमा से भी ज्यादा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में रिजर्व बैंक पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बन सकता है। हालांकि यह कदम आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे आर्थिक ग्रोथ पर असर पड़ने का खतरा भी है। मार्च के दौरान ब्रेंट क्रूड का औसत भाव करीब 100 डॉलर रहा। ऐसे में बाजार में यह चर्चा तेज है कि आने वाली मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक क्या रुख अपनाएगा। खासकर रुपये की कमजोरी और महंगाई के दबाव के बीच ब्याज दरों को लेकर कड़ा फैसला संभव माना जा रहा है।
एचएसबीसी ने साफ कहा है कि सिर्फ रुपये को संभालने के लिए ब्याज दर बढ़ाना महंगा पड़ सकता है। तेल की ऊंची कीमतों के साथ अगर दरें बढ़ती हैं, तो इससे विकास की रफ्तार और धीमी हो सकती है। रिपोर्ट में फिलहाल संतुलित रुख अपनाने की सलाह दी गई है। इसमें कहा गया है कि सरकार को राजकोषीय घाटा काबू में रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने जैसे कदम भी उठाने पड़ सकते हैं। साथ ही मौद्रिक नीति में लचीलापन बनाए रखने की बात कही गई है, ताकि महंगाई को 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखा जा सके।
विशेषज्ञों ने यह भी याद दिलाया कि महामारी के दौरान मांग बढ़ाने के फैसलों ने बाद में महंगाई को और भड़काया था। ऐसे में जब तक सप्लाई की दिक्कतें पूरी तरह दूर नहीं होतीं, तब तक जल्दबाजी में मांग बढ़ाना जोखिम भरा हो सकता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर तेल की कीमतों में यह तेजी कुछ और समय तक बनी रही, तो महंगाई से ज्यादा बड़ा असर आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। अब बाजार, निवेशक और उद्योग जगत की नजर आने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति पर टिकी है।






