Uttar Pradesh

सीएम ने वाराणसी से की ‘स्कूल चलो अभियान’ की शुरुआत, कहा…जीरो करेंगे ड्रॉप आउट रेट

हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने पर जोर, 1 से 15 अप्रैल तक घर-घर जाकर नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य, 2017 से पहले रहा ड्रॉपआउट रेट 19 से घटकर अब 3 फीसदी पहुंचा

वाराणसी, 4 अप्रैल 2026:

शिवपुर वरुणापार जोन स्थित कंपोजिट विद्यालय से सीएम योगी आदित्यनाथ ने नए शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए ‘स्कूल चलो अभियान’ की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने शिक्षकों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों से साफ कहा कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहना चाहिए। हमें मिलजुल कर 19 से 3 फीसदी पहुंचे ड्रॉप आउट रेट को जीरो करना है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों की प्रदर्शनी देखी और उनसे बातचीत भी की। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, यह बच्चों के संस्कार और भविष्य दोनों तय करती है। अगर बच्चा पढ़ेगा तो समाज आगे बढ़ेगा, नहीं पढ़ेगा तो पीछे छूट जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 साल में करीब 60 लाख नए बच्चों को बेसिक शिक्षा के स्कूलों से जोड़ा गया है। पहले जहां ड्रॉपआउट रेट 19 फीसदी था, वह अब घटकर 3 फीसदी रह गया है। अब लक्ष्य इसे पूरी तरह खत्म करने का है। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि 1 से 15 अप्रैल के बीच घर-घर जाकर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करें। अभिभावकों से सीधे बात करें और उन्हें बताएं कि सरकार की तरफ से पढ़ाई से जुड़ी सुविधाएं मुफ्त मिल रही हैं। नामांकन के बाद जल्द ही डीबीटी के जरिए अभिभावकों के खातों में पैसा भेजा जाएगा, जिससे यूनिफॉर्म, जूते-मोजे खरीदे जा सकें।

मुख्यमंत्री ने एक उदाहरण साझा करते हुए कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद 1 जुलाई को ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया गया था। उससे पहले जब मैं अलग-अलग जनपदों में गया तो बेसिक शिक्षा विभाग के जर्जर भवनों, बंदी के कगार पर पहुंचे विद्यालयों की स्थिति देखी। एक जनपद के विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। सिर्फ 10 बच्चे रह गए, हो सकता है कि नए सत्र में वे बच्चे भी न आएं। मैंने पूछा कि ये बच्चे जा कहां रहे हैं, प्रधानाचार्य ने कहा कि बच्चों में पढ़ने की रूचि नहीं है। मैंने कहा कि उनकी पढ़ने में रूचि नहीं है या आपकी पढ़ाने में, दोनों में अंतर है। बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाना हमारा काम है। 3 वर्ष बाद फिर उस विद्यालय में गया तो वहां 250 बच्चे मिले और उन्हीं प्रधानाचार्य का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ था। सभी विद्यालय ऐसे उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब प्रदेश में स्कूली शिक्षा पर 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहा है। बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे सब कुछ मुफ्त दिया जा रहा है। इसके लिए हर बच्चे के अभिभावक को 1200 रुपये की मदद भी दी जा रही है। चित्रकूट के डीएम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बच्चे का दाखिला आंगनवाड़ी में कराया, यह एक अच्छा संदेश है। शिक्षक भी ऐसा कर सकते हैं, जिससे सरकारी स्कूलों पर भरोसा बढ़े। इस महीने से अनुदेशकों को 17 हजार और शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। साथ ही शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा शुरू की जा रही है।

कार्यक्रम में मंत्री राकेश सचान, अनिल राजभर, रविंद्र जायसवाल, महापौर अशोक तिवारी, विधायक नीलकंठ तिवारी, अवधेश सिंह, त्रिभुवन राम, सुशील सिंह, विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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