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होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव : ट्रंप की धमकी पर ईरान का तंज… चाबी खो गई, सीजफायर पर भी सस्पेंस

अमेरिका-ईरान टकराव के बीच ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ की चर्चा, तेहरान बोला- सिर्फ युद्धविराम नहीं, हमारी शर्तें भी माननी होंगी

न्यूज डेस्क, 6 अप्रैल 2026:

दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी चरम पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनियों के बीच ईरान ने भी तीखे और तंज भरे अंदाज में जवाब देकर माहौल और गरमा दिया है।

जिम्बाब्वे स्थित ईरानी दूतावास ने ट्रंप के अल्टीमेटम पर व्यंग्य करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की चाबी खो गई है। वहीं दक्षिण अफ्रीका में ईरानी मिशन ने मजाकिया लहजे में लिखा कि चाबी फूलदान के नीचे है, दोस्तों के लिए रास्ता खुला है। इन प्रतिक्रियाओं ने सोशल मीडिया पर बहस तेज कर दी है।

दरअसल, ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह तुरंत होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे, अन्यथा उसे गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमले की धमकी देते हुए कहा कि अगर चेतावनी नहीं मानी गई तो ईरान को नरक में बदल दिया जाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यहां तक कहा कि पावर प्लांट डे और ब्रिज डे एक साथ मनाया जाएगा। उनका इशारा संभावित हमलों की ओर था।

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इस बीच क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास भी सामने आए हैं। इजराइली मीडिया के अनुसार पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच सीजफायर का प्रस्ताव रखा है जिसे अस्थायी तौर पर इस्लामाबाद अकॉर्ड नाम दिया गया है। हालांकि इस पर अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया कि केवल युद्धविराम उनके लिए स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्धविराम का मतलब विरोधियों को फिर से ताकत जुटाने का मौका देना है। बगाई ने जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में ईरान की शर्तों को भी शामिल करना जरूरी होगा।

उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार किसी देश के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने और नागरिक ठिकानों पर हमला करने की धमकी देना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमले बढ़े तो वह वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित कर सकता है।

ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कहा कि जवाब केवल सैन्य नहीं होगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार को प्रभावित करने वाला होगा। उन्होंने संकेत दिया कि होर्मुज के साथ-साथ बाब-अल-मंदेब जैसे अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी निशाने पर आ सकते हैं। ऐसे में दुनिया की नजर अब इस टकराव पर टिकी है जहां एक तरफ युद्ध की आशंका है तो दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की उम्मीद भी बनी हुई है।

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