कुसम्ही जंगल में सजेगा आधुनिक इको पार्क, गोरखपुर बनेगा पूर्वांचल का नया टूरिज्म हब
4.84 करोड़ की परियोजना को मिली रफ्तार, स्विस कॉटेज, ट्री हाउस और योग केंद्र जैसी सुविधाएं देंगी नया अनुभव
लखनऊ/गोरखपुर, 6 अप्रैल 2026:
यूपी में धार्मिक पर्यटन के साथ अब इको-टूरिज्म को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में एक अत्याधुनिक इको पार्क विकसित किया जा रहा है। करीब 4.84 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पहली किस्त के रूप में 50 लाख रुपए जारी कर दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार की योजना गोरखपुर को पूर्वांचल के प्रमुख पर्यटन हब के रूप में स्थापित करने की है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा और अपनी अलग पहचान बना रहा है।
कुसम्ही जंगल में विकसित होने वाला यह इको पार्क पर्यटकों को प्रकृति के बीच आधुनिक सुविधाओं का अनूठा अनुभव देगा। यहां स्विस कॉटेज, ट्री हाउस, योग केंद्र, इंटरप्रिटेशन सेंटर और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना के तहत 15.58 लाख रुपए की लागत से आकर्षक प्रवेश द्वार बनाया जाएगा, जबकि 28.45 लाख रुपए से आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर तैयार होगा। एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत से स्विस कॉटेज का निर्माण भी प्रस्तावित है।
पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए 32.77 लाख रुपए की लागत से कैफेटेरिया विकसित किया जाएगा। 30.88 लाख रुपए में ट्री हाउस और टेंट कैंपिंग जैसी रोमांचक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। इसके अलावा 41.86 लाख रुपए की लागत से आधुनिक योग केंद्र का निर्माण होगा जहां पर्यटक शांत वातावरण में योग और ध्यान का लाभ उठा सकेंगे। परियोजना में बायो टॉयलेट, सुरक्षा फेंसिंग, सोलर सबमर्सिबल, पार्किंग और बैठने की सुविधाएं भी शामिल हैं।
गोरखपुर से कुशीनगर मार्ग पर स्थित कुसम्ही जंगल गोरखपुर रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके आसपास रामगढ़ ताल और भगवान बुद्ध से जुड़े प्रमुख स्थल भी हैं। इससे यह क्षेत्र पर्यटन के लिए और अधिक आकर्षक बनता है।
अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि इको टूरिज्म बोर्ड के गठन के बाद राज्य में जंगलों, नदियों और झीलों को संरक्षित रखते हुए उन्हें पर्यटन के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।






