
लखनऊ, 27 अगस्त 2026:
यूपी की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जुबानी जंग लगातार तीखी होती जा रही है। योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने गुरुवार को एक बार फिर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। इस बार राजभर ने भजन की पंक्ति ‘उठ जाग मुसाफिर भोर भई’ के जरिए अखिलेश को राजनीतिक रूप से ‘जागने’ की सलाह दी।
मंत्री राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह भजन अखिलेश भाई के लिए है। उन्होंने अखिलेश को आंखें खोलने की नसीहत देते हुए सहारनपुर जाने और वहां जनसभा करने की चुनौती भी दी। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि ‘चवन्नी’ के चक्कर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 36 बिरादरी उनके खिलाफ खड़ी हो गई है।
सुभासपा प्रमुख ने अखिलेश पर जातियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या यही उनका ‘पीडीए’ है। उन्होंने गैर-यादव ओबीसी जातियों को कथित तौर पर अपमानित करने का भी आरोप लगाया। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश अभी भी इस भ्रम में हैं कि लाठी के दम पर सरकार बनाई जा सकती है।
राजभर यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि ‘लठैतों का दौर 2017 में चला गया, जो अब लौटने वाला नहीं है। न 2027 में, न अगली पैदाइश में।’ उन्होंने दादरी की सभा को फ्लॉप बताते हुए दावा किया कि उसके बाद अखिलेश दूसरी बड़ी सभा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
"उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो तू सोवत है"
अखिलेश भाई, यह भजन आपके लिए है। जग जाइए, आँख खोल लीजिए।
वैसे, हिम्मत नहीं हो रही न सहारनपुर जाने की? वहां जाकर एक जनसभा को संबोधित करने की? चवन्नी के चक्कर में खड़ी हो गई न 36 बिरादरी आपके खिलाफ?
आप और आपके लोग ऐसी हरकते…
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) August 27, 2026
राजभर के ताजा हमले ऐसे समय में आए हैं जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा की सक्रियता बढ़ रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक सहारनपुर सितंबर में मिशन-2027 की सियासी गतिविधियों का अहम केंद्र बनने जा रहा है और अखिलेश यादव की भी वहां सभा प्रस्तावित है।
गौरतलब है कि राजभर पिछले कई सप्ताह से लगातार अखिलेश यादव और सपा पर हमलावर हैं। इससे पहले भी वे ‘चवन्नी’, पीडीए और 2027 के चुनाव को लेकर अखिलेश पर तंज कस चुके हैं। दिलचस्प यह है कि राजभर के लगातार हमलों के बावजूद अखिलेश यादव फिलहाल उन्हें तवज्जो देते नजर नहीं आ रहे हैं। अखिलेश भाजपा और उसके नेताओं पर लगातार निशाना साध रहे हैं।






