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गोचर भूमि से गोवंश को संजीवनी! UP में बड़ा अभियान, 39,721 हेक्टेयर जमीन अतिक्रमण मुक्त कर चारे की मजबूत व्यवस्था

58 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में हरित चारा अभियान तेज, 5,050 गो आश्रय स्थलों को गोचर भूमि से जोड़ा गया, सूखा, गर्मी और चारे के संकट से निपटने के लिए 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट भी 24 घंटे सक्रिय

लखनऊ, 26 जुलाई 2026:

यूपी में गोवंश संरक्षण और पशुपालकों को राहत देने के लिए सरकार ने गोचर भूमि पर हरित चारा आच्छादन अभियान को मिशन मोड में तेज कर दिया है। सरकार का लक्ष्य संभावित सूखे, गर्मी और चारे की कमी जैसी चुनौतियों से पहले ही निपटते हुए गोवंश के लिए पर्याप्त हरा चारा, पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। इसी कड़ी में अब तक 39,721 हेक्टेयर गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर पशुधन के लिए उपयोगी बनाया गया है।

प्रदेश की 58,115 ग्राम पंचायतों में 61,118.85 हेक्टेयर गोचर भूमि उपलब्ध है। इनमें संचालित 6,287 अस्थायी और स्थायी गो आश्रय स्थलों में से 5,050 गो-आश्रय स्थलों को 10,421.45 हेक्टेयर गोचर भूमि से जोड़ा गया है जिससे गोवंश के लिए सालभर हरे चारे की उपलब्धता बनी रहे।

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार गोचर भूमि पर हरित चारा आच्छादन में हरदोई प्रदेश में सबसे आगे है। वहां 462.76 हेक्टेयर क्षेत्र में हरित चारा लगाया गया है। इसके बाद फतेहपुर (176.69 हेक्टेयर), रायबरेली (163.33), संभल (152.74), आगरा (151.00), अलीगढ़ (150.00), बहराइच (133.56), बाराबंकी (121.28), फिरोजाबाद (115.00) और हमीरपुर (107.00 हेक्टेयर) प्रमुख जिलों में शामिल हैं।

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सरकार ने चारे की कमी वाले जिलों खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र की पहचान कर विशेष रणनीति तैयार की है। इन जिलों में अधिक उत्पादन वाले जनपदों से अंतरजनपदीय स्तर पर चारा और भूसा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही अधिसूचित वन क्षेत्रों से घास और अन्य चारे की व्यवस्था भी की जाएगी जिससे किसी भी स्थिति में पशुओं को चारे का संकट न झेलना पड़े।

पेयजल संकट से निपटने के लिए पानी की कमी वाले क्षेत्रों में तालाबों और पोखरों को नहर अथवा नलकूप के माध्यम से भरने तथा आवश्यकता पड़ने पर वॉटर टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, असंतुलित चारे से होने वाली नाइट्रेट और नाइट्राइट विषाक्तता से बचाव के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई है।

सरकार वीबी-जी-राम-जी योजना के तहत चारागाह और गोचर भूमि के विकास को भी गति दे रही है। पशुओं के उपचार के लिए जीवन रक्षक दवाइयों और टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही हीट स्ट्रेस से बचाव के लिए मिनरल मिक्सचर और इलेक्ट्रोलाइट वितरित किए जा रहे हैं। संक्रामक रोगों की निगरानी भी लगातार की जा रही है। इसके अलावा प्रदेश की 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। इनकी सेवाएं 1962 टोल-फ्री नंबर के माध्यम से उपलब्ध हैं।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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