न्यूज डेस्क, 16 अप्रैल 2026:
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक पर संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में गुरुवार को जोरदार बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्पष्ट संदेश दिया कि जो इस ऐतिहासिक पहल का विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने इसे भारत की विकास यात्रा का निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि देश की बहनों पर भरोसा किया जाए और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी दी जाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देना केवल राजनीतिक कदम नहीं बल्कि लोकतंत्र को और अधिक समृद्ध और प्रतिनिधिक बनाने का प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मंथन से देश के भविष्य की दिशा तय होगी। यह पल संसद के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम 20-25 साल पहले उठाया जाना चाहिए था।

बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जानकारी दी कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इससे हर राज्य में सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इसके साथ ही लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
यह प्रस्ताव 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रावधानों पर आधारित है। इसे लागू करने को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। यानी पहले सीटों का पुनर्गठन होगा फिर आरक्षण लागू किया जाएगा।
विपक्ष ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने संसद में इसे पेश किए जाने पर आपत्ति जताई। गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब देगी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परिसीमन के जरिए उत्तर भारत में सीटों की संख्या बढ़ाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। इससे दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कमजोर होगा।
हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिलेगा और महिला सशक्तिकरण ही इसका मुख्य उद्देश्य है। संसद में जारी यह बहस आने वाले समय में देश की राजनीति और लोकतांत्रिक ढांचे को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।






