Lucknow City

महिला आरक्षण पर घमासान : अखिलेश का वार… भाजपा की साजिश बेनकाब, सत्ता छोड़ने का वक्त

सपा मुखिया ने परिसीमन और आरक्षण पर उठाए सवाल, भाजपा पर भय और विभाजन की राजनीति का आरोप, महिलाओं को नारा नहीं, अधिकार देने की मांग

लखनऊ, 19 अप्रैल 2026:

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल के पारित न हो पाने के बाद देश की राजनीति में तीखा टकराव देखने को मिल रहा है। इसी मुद्दे पर रविवार को लखनऊ में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला।

लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि संसद में बिल का पास न होना सरकार की बदनीयत की हार है। उन्होंने इसे विपक्ष की ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि संसद में हार का मतलब है कि सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है। उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।

अखिलेश ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण के नाम पर समाज में विभाजन पैदा करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की रणनीति महिलाओं को बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की थी लेकिन आज की जागरूक नारी उनके बहकावे में नहीं आने वाली। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि भाजपा नारी को अधिकार नहीं, नारा बनाना चाहती है।

सपा प्रमुख ने परिसीमन के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बिना सही जनगणना के आरक्षण का आधार ही गलत है। उनका तर्क था कि अगर पिछड़ों की आबादी 66 प्रतिशत है तो उसमें 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल महिलाओं को सशक्त करने के बजाय उनकी शक्ति को सीमित करने की साजिश था।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर सीएमएफ फॉर्मूला (क्रिएट, मिस्टीरियल और फियर) के जरिए समाज में भय और अविश्वास फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि यह रणनीति अब विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बिल लाए जा रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सरकार किसी महिला को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। साथ ही, पूर्व सांसद स्मृति ईरानी के गोरखपुर से चुनाव लड़ने की बात पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कन्नौज का नाम गोरखपुर और गोरखपुर का नाम गोरखधंधा कर दूंगा।

सियासी घटनाक्रम कै देखते हुए जानकर मानते हैं कि महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में देश की राजनीति का केंद्र बना रहेगा, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।

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