लखनऊ, 21 अप्रैल 2026:
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में मंगलवार को एक बड़े खुलासे में फर्जी डॉक्टर बनकर घूम रहे एक युवक को पकड़ लिया गया। आरोपी की पहचान हस्साम उर्फ हसम अहमद के रूप में हुई है। उसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। आरोप है कि वह छात्राओं को प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरण और बाहर ले जाने की साजिश रच रहा था।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक हाल ही में सामने आए रमीज मलिक प्रकरण के बाद कुलपति के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी। टीम को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी दौरान सूचना मिली कि कुछ लोग छात्राओं को बहला-फुसलाकर लखनऊ से बाहर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी खुद को डॉक्टर बताकर मेडिकल कैंप आयोजित करता था और छात्राओं को एम्स दिल्ली में अमेरिका के डॉक्टरों से मिलवाने का झांसा देता था। 20 अप्रैल को लगाए गए एक कैंप में करीब 20 केजीएमयू छात्र-छात्राएं मौजूद मिलीं। इससे शक गहरा गया। इसके बाद टीम ने जाल बिछाया और केजीएमयू के सर्जरी विभाग के पास आरोपी को पकड़ लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने केजीएमयू के नाम से फर्जी लेटरहेड तैयार कर रखा था और छात्राओं को दिए गए पत्रों पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। प्रवक्ता के अनुसार आरोपी हमेशा डॉक्टर की वेशभूषा में रहता था। विश्वविद्यालय के कई विभागों में आने-जाने का दावा करता था। हालांकि स्टाफ से उसके वास्तविक संपर्क की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
पूछताछ में आरोपी ने खुद को 12वीं पास और सिद्धार्थनगर जनपद का निवासी बताया। उसने लखनऊ के शिया इंटर कॉलेज से पढ़ाई की है। उसने समाज सेवा के नाम पर एक संस्था बना रखी थी। उसके जरिए मेडिकल कैंप आयोजित किए जाते थे।
पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि उसके साथ चार डॉक्टर जुड़े हैं। वह अस्पताल खोलने की योजना बना रहा था। उसने अपनी संस्था से जुड़े कुछ लोगों के नाम भी बताए जिनमें एरा मेडिकल कॉलेज और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित डॉक्टरों का जिक्र है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीर साजिश मानते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।






