Uttarakhand

कुम्भ 2027 की तैयारियों पर सख्त मुख्य सचिव, 3 दिन में शासनादेश जारी करने का अल्टीमेटम

भूमि अधिग्रहण से ट्रैफिक प्लान तक तेजी लाने के निर्देश, 30 जून तक भूमि आवंटन पूरा करने की समयसीमा तय

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 29 अप्रैल 2026:

उत्तराखंड में कुम्भ मेला 2027 की तैयारियों को लेकर शासन स्तर पर सख्ती बढ़ा दी गई है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और कई अहम निर्देश जारी किए।

बैठक में निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए मुख्य सचिव ने कई परियोजनाओं के शासनादेश जारी न होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी आपत्तियों का निस्तारण कर अगले तीन दिनों के भीतर शासनादेश हर हाल में जारी किए जाएं।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेले के लिए भूमि अधिग्रहण और आवंटन प्रक्रिया को तत्काल शुरू करने के निर्देश देते हुए 30 जून तक सभी विभागों और संस्थानों को भूमि आवंटित करने की समयसीमा तय की। साथ ही आयुक्त गढ़वाल को निर्देशित किया गया कि भूमि अधिग्रहण और आवंटन प्रक्रिया को कुम्भ मास्टर प्लान में शामिल किया जाए।

उन्होंने निर्माणदायी संस्थाओं को मेला क्षेत्र में अपने कार्यालयों को मजबूत करने और आवश्यक तैनातियां शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अस्थायी प्रकृति के कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर जल्द शुरू करने पर जोर दिया गया। यातायात व्यवस्था को लेकर भी मुख्य सचिव ने विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने मेलाधिकारी कुम्भ, आईजी कुम्भ और डीआरएम मुरादाबाद को रेलवे और सड़क यातायात का समग्र प्लान तैयार कर जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।

हरिद्वार, नजीबाबाद और मैंगलोर मार्गों पर एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग द्वारा स्पर और जंक्शन निर्माण एवं मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा कराने को कहा गया। इसके अलावा आसपास के जिलों में ट्रैफिक प्लान, पार्किंग सुविधाओं के विस्तार और आकस्मिक यातायात योजना तैयार रखने के निर्देश भी दिए गए। राज्य की सीमाओं पर पार्किंग, भोजन और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

स्वच्छता को लेकर मुख्य सचिव ने पूरे कुम्भ क्षेत्र के लिए एक विशेष सैनिटेशन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के मद्देनजर साफ-सफाई सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त पर्यटक सूचना केंद्र स्थापित करने और कुम्भ के दौरान प्रदेश की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

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