Uttar Pradesh

जेवर एयरपोर्ट से भरिए उड़ान… बस थोड़ा इंतजार, NCR को मिला नया एविएशन पावरहाउस

योगी सरकार की बड़ी छलांग, इंडिगो की पहली फ्लाइट से 15 जून को शुरुआत, आकासा और एयर इंडिया एक्सप्रेस भी तैयार, पश्चिमी यूपी में निवेश, रोजगार और कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

लखनऊ/जेवर, 3 मई 2026:

उत्तर भारत के एविएशन सेक्टर में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। 15 जून से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआईए) से कमर्शियल फ्लाइट्स का संचालन शुरू हो जाएगा। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई दबाव को कम करने के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए आधुनिक और विश्वस्तरीय एविएशन गेट-वे के रूप में उभरेगा।

एयरपोर्ट का संचालन प्रधानमंत्री के उद्घाटन और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) से एयरोड्रोम सुरक्षा कार्यक्रम (एएसपी) की मंजूरी मिलने के बाद शुरू हो रहा है। यह मंजूरी दर्शाती है कि एयरपोर्ट सुरक्षा, संचालन और सभी तकनीकी मानकों पर पूरी तरह खरा उतर चुका है।

पहली कमर्शियल फ्लाइट इंडिगो की ओर से संचालित की जाएगी। इसके बाद आकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस भी अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी में हैं। उड़ानों के रूट, टाइमिंग और अन्य सुविधाओं का शेड्यूल जल्द जारी किया जाएगा।

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यूपी के सीएम योगी के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक क्लस्टर्स के साथ जुड़ा यह एयरपोर्ट राज्य को लॉजिस्टिक्स और एविएशन हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जोड़ा गया है। इससे यात्रियों और कार्गो ऑपरेटरों दोनों को तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी।

यह एयरपोर्ट स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का अनूठा संगम है। इसे यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) द्वारा विकसित किया गया है। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के रूप में तैयार यह एयरपोर्ट टिकाऊ डिजाइन और नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ बनाया गया है।

फिलहाल एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ यह एयरपोर्ट सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता रखता है। इसे भविष्य में बढ़ाकर 7 करोड़ से अधिक करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन, व्यापार और निवेश को जबरदस्त गति मिलेगी। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे जो उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ के लक्ष्य के और करीब ले जाएंगे।

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