National

टीएमसी से बगावत, भाजपा का ब्रह्मास्त्र… शुभेंदु अधिकारी का संघर्ष ऐसे बना ममता के गढ़ का अंत!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : नंदीग्राम से निकला नेता बना सत्ता का सबसे बड़ा दावेदार, टीएमसी छोड़कर भाजपा को दिलाई निर्णायक बढ़त

न्यूज डेस्क, 4 मई 2026:

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम के रुझानों में भाजपा की प्रचंड बढ़त ने राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। 293 सीटों वाले इस चुनाव में भाजपा 200 के पार जाती दिख रही है। इससे पहली बार बंगाल में भगवा सरकार बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे कई बड़े चेहरे सक्रिय रहे लेकिन सबसे अहम नाम उभरकर सामने आया है। वह नंदीग्राम के विधायक और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी हैं।

शुभेंदु अधिकारी को इस जीत का ‘मास्टरमाइंड’ माना जा रहा है। 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु ने बीते पांच वर्षों में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व मेदिनीपुर के करकुली गांव में जन्मे शुभेंदु एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं जबकि उनके भाई भी सक्रिय राजनीति में हैं।

WhatsApp Image 2026-05-04 at 8.07.36 PM

राजनीति में उनकी शुरुआत 1995 में कांग्रेस से हुई लेकिन 1998 में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर उन्होंने तेजी से पहचान बनाई। 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन ने उन्हें राज्य की राजनीति में एक बड़ा चेहरा बना दिया। इस आंदोलन ने वामपंथी सरकार की नींव हिला दी और 2011 में टीएमसी को सत्ता तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

टीएमसी में शुभेंदु का कद इतना बढ़ गया था कि उन्हें ममता बनर्जी के बाद नंबर-2 नेता माना जाने लगा था लेकिन समय के साथ पार्टी में अभिषेक बनर्जी और रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बढ़ते प्रभाव ने उनके और नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ा दी। आखिरकार 2020 में उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया।

WhatsApp Image 2026-05-04 at 8.09.42 PM

2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 1956 वोटों से हराकर ‘जायंट किलर’ की छवि हासिल की। इसी जीत के बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया और तभी से उन्हें भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर देखा जाने लगा।

2026 के चुनाव में शुभेंदु को पूरी रणनीतिक कमान मिली। टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी मैनेजमेंट तक में उनकी निर्णायक भूमिका रही। उन्होंने न केवल गुटबाजी से जूझ रही भाजपा इकाई को एकजुट किया बल्कि ग्रामीण बंगाल में भी पार्टी की पकड़ मजबूत की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह के साथ उनके करीबी संबंधों ने भी उनके कद को और बढ़ाया। यही वजह है कि आज जब भाजपा बंगाल में सत्ता के बेहद करीब है तो शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं।

WhatsApp Image 2026-05-04 at 8.07.30 PM

बंगाल की सियासत में यह बदलाव सत्ता परिवर्तन के साथ ही एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। इसके केंद्र में हैं शुभेंदु अधिकारी जिनकी रणनीति और जमीनी पकड़ ने इतिहास रचने की नींव रख दी है।

READ MORE 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button