योगेंद्र मलिक
देहरादून, 5 मई 2026:
उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं को लेकर अब ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को समीक्षा बैठक में साफ संकेत दे दिए कि सभी प्रोजेक्ट तय समय सीमा में हर हाल में पूरे हों। उन्होंने रोपवे निर्माण की धीमी प्रगति पर सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य सचिव ने ब्रिडकुल को रोपवे परियोजनाओं के नियामक प्राधिकरण के रूप में मजबूत करने के निर्देश दिए। इसके लिए स्पष्ट रोल और रेस्पॉन्सिबिलिटी का ड्राफ्ट जल्द तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही जागेश्वर धाम योजना में भी रोपवे प्रोजेक्ट को शामिल करने के निर्देश देकर सरकार ने धार्मिक पर्यटन को नई गति देने का संकेत दिया है।
रोपवे परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय उपसमिति गठित की गई है। इसकी अध्यक्षता प्रमुख सचिव नियोजन करेंगे। इस कमेटी में पर्यटन, आवास, लोक निर्माण विभाग और नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति प्रदेशभर में बनने वाले रोपवे प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता और लोकेशन तय करेगी।
मसूरी रोपवे की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने लोअर टर्मिनल के पास सड़क मार्ग से जुड़े विवाद को तीन दिन में निपटाने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने साफ कहा कि समयसीमा से कोई समझौता नहीं होगा। वहीं, केदारनाथ रोपवे को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने लॉजिस्टिक्स का ड्राई रन कर असुरक्षित स्थानों की पहचान और सुधार कार्य तत्काल शुरू कराने को कहा। कुंड ब्रिज और नई बाईपास सड़क को जल्द पूरा करने के साथ जहां जरूरत हो, नए ब्रिज और बाईपास के सर्वे व निर्माण को समानांतर चलाने के निर्देश दिए गए।
केदारनाथ रोपवे के लोअर टर्मिनल पर पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भूमि चिन्हीकरण और हस्तांतरण प्रक्रिया भी तत्काल शुरू करने को कहा गया है। हेमकुंड साहिब और केदारनाथ दोनों परियोजनाओं के लिए पर्ट चार्ट तैयार कर सख्ती से अनुपालन कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि केदारनाथ रोपवे का एग्रीमेंट साइन होने के साथ एलओए जारी हो चुका है। लिडार सर्वे पूरा हो चुका है जबकि तकनीकी और टोपोग्राफी सर्वे जारी हैं। हेमकुंड साहिब परियोजना में भी एलओए जारी हो चुका और भूमि सर्वेक्षण तेजी से आगे बढ़ रहा है।






