लखनऊ, 6 मई 2026:
यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। सत्ताधारी भाजपा ने अभी से ‘मिशन 2027’ की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल फतह के बाद अब पार्टी का पूरा फोकस यूपी में फिर से कमल खिलाने पर है। इसी रणनीति के तहत योगी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की तैयारी अंतिम दौर में पहुंच चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक लंबी बैठकों और मंथन के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख नजदीक मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल 7 मई को बिहार मंत्रिमंडल विस्तार, 8 मई को असम और 9 मई को पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की व्यस्तताओं में उलझा है। इसके बाद यूपी में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बड़े बदलाव किए जाएंगे।
बताया जा रहा है कि इस बार का विस्तार पूरी तरह चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर खास जोर रहेगा। खासतौर पर ओबीसी और दलित वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज से भी सीमित लेकिन अहम प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
मंत्रिमंडल में कई नए और युवा चेहरों को मौका मिलने की संभावना है जबकि उम्रदराज और कमजोर प्रदर्शन वाले कुछ मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है। कुछ मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी देने की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार एक दर्जन से ज्यादा नामों पर मंथन हुआ है लेकिन अंतिम मुहर अभी बाकी है।
सहयोगी दलों को साधने की रणनीति के तहत अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी से भी मंत्री बनाए जाने की भी संभावना है। इनके नाम संबंधित दलों के शीर्ष नेतृत्व तय करेंगे। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी इस बार विशेष जोर है। खासकर दलित और पिछड़े वर्ग की महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है।
इसके अलावा कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल और राज्यमंत्रियों को प्रमोशन देकर कैबिनेट में जगह देने की भी तैयारी है। कहा जा रहा है कि योगी सरकार का यह संभावित विस्तार सत्ता संतुलन साधने की कोशिश के साथ 2027 के चुनावी रण की मजबूत नींव भी साबित हो सकता है।






