Uttar Pradesh

सहयोगी’ से ‘सिस्टम की रीढ़’ बने शिक्षामित्र, योगी सरकार ने बढ़ाया मानदेय, बदली पूरी तस्वीर

3,500 से 18,000 रुपये तक का सफर, डिजिटल ट्रेनिंग और जिम्मेदारी के साथ शिक्षामित्र अब शिक्षा सुधार की सबसे मजबूत कड़ी

लखनऊ, 6 मई 2026:

यूपी में शिक्षामित्रों को लेकर योगी सरकार की नीति अब ठोस नतीजों के साथ सामने आ रही है। कभी केवल ‘सहयोगी’ माने जाने वाले शिक्षामित्र आज शिक्षा व्यवस्था के एक जिम्मेदार और प्रभावी स्तंभ बनकर उभरे हैं। सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से उन्हें तकनीकी और शैक्षणिक रूप से सशक्त करने के साथ आर्थिक रूप से भी मजबूती दी है।

सबसे बड़ा बदलाव उनके मानदेय में देखने को मिला है। पहले शिक्षामित्रों को मात्र 3,500 रुपये प्रतिमाह मिलता था। उसे बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया और अब एक अप्रैल 2026 से यह 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी ने न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार किया है बल्कि वर्षों से किए जा रहे उनके योगदान को भी औपचारिक मान्यता दी है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि आर्थिक मदद के साथ क्षमता निर्माण भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत शिक्षामित्रों को लगातार प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें विषय आधारित पढ़ाई, बच्चों की समझ के अनुरूप शिक्षण तकनीक, बुनियादी साक्षरता और मूल्यांकन की आधुनिक विधियों से जोड़ा गया। इससे उनकी शिक्षण गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने को मिला है।

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डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षामित्रों को DIKSHA प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। यहां उन्हें ई-कंटेंट, स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन टीचिंग की ट्रेनिंग दी गई। इससे वे तकनीक का बेहतर उपयोग कर छात्रों को आधुनिक तरीके से पढ़ा सकें। यह बदलाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के स्कूलों में असरदार साबित हो रहा है।

इसके साथ ही विद्यालयों में उनकी भूमिका को स्पष्ट किया गया और जवाबदेही तय की गई। नियमित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया। इससे उनके काम का आकलन भी संभव हुआ। नामांकन अभियान और मिशन प्रेरणा जैसे कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। इसका सीधा असर स्कूलों में बढ़ते नामांकन और बेहतर शिक्षण स्तर के रूप में सामने आया है। आज शिक्षामित्र केवल सहायक नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के बदलाव के असली वाहक बन चुके हैं।

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