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मलिहाबादी आम को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की तैयारी… यूपी में बनेगा नया बागवानी मॉडल

FRUIT HORIZON-2026 कार्यक्रम में रहमानखेड़ा पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, किसानों को तकनीक, प्रोसेसिंग और ग्लोबल मार्केट से जोड़ने का रोडमैप रखा

पंकज

काकोरी (लखनऊ), 7 मई 2026:

राजधानी में रहमानखेड़ा स्थित ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में गुरुवार को शुरू हुए दो दिवसीय फ्रूट होराइजन-2026 कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच पर फोकस किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने परिसर में 234 वैरायटी वाला आम का एक पेड़ देखा प्रूनिंग मशीन से पेड़ों की छंटाई की व बागवानों से संवाद बनाया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की बागवानी को नई पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है। मलिहाबाद के मशहूर दशहरी आम को वैश्विक ब्रांड बनाने के लिए केंद्र सरकार ने निर्यात, आधुनिक तकनीक, प्रोसेसिंग और डिजिटल नेटवर्क पर आधारित बड़ा रोडमैप तैयार किया है।

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सरकार देगी डिजिटल प्लेटफॉर्म

उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए फसल उगाना ही काफी नहीं है। पैकेजिंग, भंडारण, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग और निर्यात व्यवस्था को मजबूत करना होगा। सरकार जल्द ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करेगी, जो पौध तैयार होने से लेकर फल के निर्यात तक पूरी व्यवस्था को एक मंच से जोड़ेगा। इससे किसानों को बाजार, वैज्ञानिक सलाह और नई तकनीक की जानकारी आसानी से मिलेगी।

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यूपी में बनेंगे क्लीन प्लांट सेंटर

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश में क्लीन प्लांट सेंटर खोले जाएंगे। यहां किसानों को रोगमुक्त और प्रमाणित पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि खराब पौध सामग्री की वजह से कई बार किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। नए सेंटर इस समस्या को कम करने में मदद करेंगे। इसमें निजी कंपनियों की भागीदारी भी होगी।

उन्होंने बताया कि सरकार आम और केले के निर्यात में पांच प्रतिशत जबकि अंगूर के निर्यात में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसके लिए उत्पादन से लेकर एक्सपोर्ट तक हर स्तर पर सुधार किए जाएंगे।

दशहरी आम को मिलेगा ग्लोबल ब्रांड का दर्जा

कार्यक्रम में मलिहाबाद के दशहरी आम की खास चर्चा रही। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रूस समेत कई देशों में मलिहाबाद के आम की मांग लगातार बढ़ रही है। भारतीय आम का स्वाद दुनिया में अलग पहचान रखता है। अब कोशिश यह है कि मलिहाबाद का आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत ब्रांड के तौर पर स्थापित हो।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने आम की शेल्फ लाइफ 30 से 35 दिन तक बढ़ाने में सफलता हासिल की है। अब इसे 40 से 45 दिन तक ले जाने पर काम चल रहा है। इससे समुद्री रास्ते से निर्यात आसान होगा और लागत कम पड़ेगी। अभी एयर कार्गो के जरिए भेजना महंगा पड़ता है। अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और कोरिया जैसे नए बाजारों तक भारतीय आम पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

तकनीक आधारित खेती पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में खेती पूरी तरह तकनीक आधारित होगी। किसानों को फसल सुरक्षा, गुणवत्ता सुधार, कटाई के बाद रखरखाव और निर्यात मानकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञ टीम बनाई जाएगी। सरकार किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से भी जोड़ना चाहती है ताकि उन्हें उपज का बेहतर दाम मिल सके। पुराने बागों के जीर्णोद्धार, मशीनों से कटाई-छंटाई और इंटर क्रॉपिंग तकनीक को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

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यूपी में तैयार होंगे निर्यात क्लस्टर

कार्यक्रम में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में आठ निर्यात क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इनमें जीएपी प्रोटोकॉल, आधुनिक पैकेजिंग, कोल्ड चेन और डिजिटल ट्रैसेबिलिटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। किसानों की उपज को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए विशेष निर्यात केंद्र भी बनाए जाएंगे। आगरा में आलू अनुसंधान केंद्र खोलने की घोषणा भी की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ाया जाए तो किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ सकती है।

एआई आधारित कोल्ड चेन और ब्लॉकचेन ट्रैकिंग पर चर्चा

तकनीकी सत्रों में देशभर से आए वैज्ञानिकों, निर्यातकों, कृषि विशेषज्ञों और एफपीओ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, आधुनिक पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और डिजिटल ट्रैसेबिलिटी पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने एआई आधारित कोल्ड चेन मॉनिटरिंग और ब्लॉकचेन आधारित ट्रैसेबिलिटी को भविष्य की जरूरत बताया। उनका कहना था कि वैश्विक बाजार में गुणवत्ता और पारदर्शिता सबसे अहम होती है।

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लीची, केला और अंगूर पर भी फोकस

केंद्रीय मंत्री ने लीची में स्टेम बग की समस्या पर चिंता जताई और विशेषज्ञ टीम भेजने का भरोसा दिया। वहीं केले और अंगूर के निर्यात को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जलवायु बागवानी के लिए बेहद मुफीद है। प्रदेश में 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त बागवानी शुरू हो चुकी है। इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे।

सोशल मीडिया पर कहा-दिल मांगे मैंगो

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक खास आम के पेड़ की तस्वीर साझा की, जिसकी हर डाल पर 234 किस्म के आम लगे थे। इसे देखकर उन्होंने दिल मांगे मैंगो लिखते हुए खुशी जताई। कार्यक्रम में किसानों ने निर्यात, लागत, कीट प्रबंधन और बाजार से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं, जिनके समाधान का भरोसा दिया गया। इस मौके पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद रहे।

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