न्यूज डेस्क, 7 मई 2026:
तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने ऐसा सियासी तूफान खड़ा किया जिसने राज्य की दशकों पुरानी राजनीति की दिशा बदल दी। महज दो साल पहले राजनीति में एंट्री करने वाले विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) ने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 234 में से 108 सीटें जीत लीं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बावजूद सत्ता की कुर्सी अब भी विजय की पहुंच से थोड़ा दूर दिखाई दे रही है।
सरकार गठन को लेकर तमिलनाडु में सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। टीवीके प्रमुख विजय गुरुवार को एक बार फिर राजभवन पहुंचे और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस दौरान सरकार बनाने के दावे और बहुमत के आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि राजभवन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल अपने रुख पर पूरी तरह अडिग हैं।

सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल की ओर से यह कहा गया कि केवल सबसे बड़ी पार्टी होने भर से सरकार बनाने का रास्ता नहीं खुल सकता। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है और विजय को यह संख्या हर हाल में साबित करनी होगी। राज्यपाल का मानना है कि तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य में अस्थिर सरकार का जोखिम नहीं लिया जा सकता।
दरअसल 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में टीवीके ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था। विजय खुद दो सीटों से चुनाव जीत गए, जबकि नियमों के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। ऐसे में पार्टी की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी। इसके बाद कांग्रेस ने डीएमके गठबंधन से अलग होकर विजय को समर्थन देने का फैसला किया।

कांग्रेस के पांच विधायक टीवीके के साथ आए जिससे आंकड़ा बढ़कर 112 तक पहुंच गया। बावजूद इसके विजय अब भी बहुमत से छह विधायक दूर हैं। बुधवार को विजय ने कांग्रेस के समर्थन पत्र के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया था। लेकिन गुरुवार को दोबारा राजभवन पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि टीवीके अभी भी समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगी हुई है।
इस बीच टीवीके नेता वीएस बाबू ने दावा किया कि सरकार गठन की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ सकती है। तमिलनाडु में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘थलापति’ विजय सत्ता का आखिरी किला भी फतह कर पाएंगे, या बहुमत का गणित उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगा?






