लखनऊ, 7 मई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित जवाहर भवन गुरुवार को उस समय आंदोलन का अखाड़ा बन गया जब भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के कार्यकर्ताओं और किसानों ने चकबंदी कार्यालय का घेराव कर दिया। किसानों ने लंबे धरना-प्रदर्शन का ऐलान करते हुए परिसर में ही डेरा डाल दिया। विरोध का अंदाज भी अलग था।
प्रदर्शनकारियों ने ईंटों का चूल्हा बनाकर वहीं पूड़ी-सब्जी तैयार करनी शुरू कर दी जिससे पूरा परिसर आंदोलन के प्रतीक स्थल में बदल गया। किसानों का गुस्सा सीधे चकबंदी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर फूटा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई जिलों में भूमाफिया किसानों की जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। चकबंदी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उन्हें खुला संरक्षण दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन बचाने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, लेकिन अफसरशाही सुनवाई करने को तैयार नहीं है। धरने के बढ़ते दबाव और माहौल गर्माने के बाद प्रशासन हरकत में आया। चकबंदी विभाग के सभागार में करीब दो घंटे तक अधिकारियों और भाकियू नेताओं के बीच तीखी वार्ता चली। बैठक में संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
भाकियू नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल कागजी भरोसे से काम नहीं चलेगा, जमीन पर कार्रवाई चाहिए। लंबी बातचीत के बाद चकबंदी अधिकारियों ने किसानों की शिकायतों को स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन सौंपा। इसमें हरदोई में चकबंदी धारा 6(1) के प्रकाशन की मांग पर कार्रवाई, प्रयागराज में कब्जा और चकबंदी विवादों की जांच, महोबा में शिकायतों की जांच के लिए समिति गठन तथा बांदा में लंबित मामलों के निस्तारण के निर्देश जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए।

आंदोलन के दौरान किसानों ने 4 जून तक धरना जारी रखने और 5 जून को प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान भी कर दिया था। हालांकि अधिकारियों की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद शाम को किसानों ने फिलहाल आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया। भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि तय समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो अगला आंदोलन और बड़ा होगा और उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।






