श्रुति गुप्ता
पौड़ी गढ़वाल, 9 मई 2026:
यमकेश्वर का पंचूर गांव हालांकि योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही सुर्खियों में आया था लेकिन वक्त बीतने के साथ इस गांव की तकदीर भी बदलती रही। सबके योगी और अपने अजय के साथ भावुक रिश्ता रखने वाला उनका पैतृक गांव पंचूर अब दुर्गम नहीं रहा। ये बेहतर सड़कों, मजबूत बुनियादी सुविधाओं और बढ़ती पर्यटक आवाजाही के कारण नई पहचान बना चुका है।
पौड़ी गढ़वाल की पहाड़ियों पर प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसे इस छोटे से गांव में कुछ साल पहले तक पहुंचना आसान नहीं था। घुमावदार पहाड़ी रास्तों से होकर गांव तक पहुंचना पड़ता था और यहां सुविधाएं भी सीमित थीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस गांव की ओर लोगों का ध्यान बढ़ा और विकास कार्यों में तेजी आई।
गांव तक पहुंचने वाली सड़कें पहले की तुलना में बेहतर हुई हैं। बिजली व्यवस्था मजबूत हुई है। बच्चों की पढ़ाई के लिए सुविधाएं बढ़ी हैं और आसपास स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार देखने को मिला है। यहां सीएम के गुरु की प्रतिमा भी स्थापित है। जो पंचूर से गोरखपुर और अजय से योगी आदित्यनाथ के सफर को खामोशी से बयां कर देती है। गांव वालों का कहना है कि पहले जो इलाका सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित था, वह अब देशभर के लोगों को यहां खींच लाता है।

योगी आदित्यनाथ ने अपने शुरुआती जीवन के कई साल इसी गांव में बिताए। परिवार और गांव के बुजुर्ग उन्हें आज भी अजय सिंह बिष्ट के नाम से याद करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बचपन से ही उनमें अनुशासन, सादगी और नेतृत्व के गुण साफ दिखाई देते थे।
गांव का वह स्कूल भी लोगों के लिए दिलचस्पी का केंद्र है, जहां उन्होंने शुरुआती शिक्षा हासिल की। जिन पगडंडियों पर चलकर उन्होंने बचपन बिताया, वे आज देश की राजनीति की एक चर्चित कहानी का हिस्सा बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री का अपने परिवार से गहरा जुड़ाव आज भी कायम है। उनकी मां, भाई और परिवार के अन्य सदस्य पंचूर में ही रहते हैं। गांव वालों के मुताबिक जब भी योगी आदित्यनाथ यहां आते हैं, परिवार के साथ समय बिताने के साथ स्थानीय लोगों से भी मुलाकात करते हैं। बच्चे खास तौर पर उनके आने का इंतजार करते हैं। यहां लगभग 50 परिवार रहते हैं। इन परिवार के कई सदस्यों को अक्सर सीएम योगी उनका नाम लेकर पुकारते है।
मुख्यमंत्री के पैतृक गांव के रूप में पहचान मिलने के बाद पंचूर में पर्यटन गतिविधियां भी बढ़ी हैं। उत्तराखंड आने वाले कई लोग अब इस गांव तक पहुंचकर उस माहौल को देखना चाहते हैं, जहां से योगी आदित्यनाथ की यात्रा शुरू हुई थी। शांत वादियों, सादगी भरे जीवन और पहाड़ी संस्कारों से घिरा पंचूर आज विकास और पहचान, दोनों का नया उदाहरण बनकर उभरा है।






