लखनऊ, 11 मई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में गर्मी के बीच बड़े जल संकट की आशंका जताई जा रही है। शहर के इंदिरानगर और गोमतीनगर समेत कई बड़े इलाकों की प्यास बुझाने वाली शारदा सहायक (इंदिरा) नहर 15 मई की आधी रात से बंद कर दी जाएगी। सिंचाई विभाग मरम्मत कार्य के लिए नहर में 15 जून तक पानी की आपूर्ति रोक देगा। इसका सीधा असर करीब पांच लाख आबादी पर पड़ेगा। उसे अगले एक महीने तक पेयजल किल्लत और सप्लाई कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
नगर निगम के जलकल विभाग का तीसरा जलकल पूरी तरह इसी नहर पर निर्भर है। नहर का पानी कठौता झील में पहुंचता है। ट्रीटमेंट के बाद वहां से इंदिरानगर और गोमतीनगर क्षेत्रों में जलापूर्ति की जाती है। नहर बंद होने के बाद पूरे सिस्टम को केवल झील में जमा पानी और नलकूपों के सहारे चलाना पड़ेगा।

जलकल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक तीसरे जलकल से रोजाना करीब 80 एमएलडी पानी की सप्लाई होती है। इसी से इंदिरानगर की 15 और गोमतीनगर की 18 ओवरहेड टंकियां भरी जाती हैं। इसके अलावा दोनों इलाकों के पांच-पांच भूमिगत जलाशयों को भी इसी पानी से भरा जाता है। सामान्य दिनों में इन क्षेत्रों में सुबह-शाम मिलाकर 14 से 16 घंटे तक जलापूर्ति की जाती है लेकिन नहर बंद होने के दौरान सप्लाई में कटौती तय मानी जा रही है।
करीब 80 एकड़ क्षेत्र में फैली कठौता झील की क्षमता 885 मिलियन लीटर है। झील की गहराई लगभग 15 फीट है। अधिकारियों का दावा है कि फिलहाल झील पूरी तरह भरी हुई है लेकिन पिछले वर्षों का अनुभव बताता है कि नहर समय पर चालू नहीं होने की वजह से हर बार लोगों को पानी संकट झेलना पड़ता है।
जलकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नहर बंद रहने के दौरान कठौता झील में जमा पानी से सप्लाई जारी रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त नलकूप भी चलाए जाएंगे ताकि लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। हालांकि भीषण गर्मी और बढ़ती मांग के बीच जलकल विभाग की सबसे बड़ी चुनौती पांच लाख आबादी तक नियमित पानी पहुंचाना होगी।






