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लखनऊ के डॉ. राजेंद्र प्रसाद को पद्मश्री, जानिए KGMU के पूर्व HOD और 12 किताबों के लेखक का पूरा सफर

डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनके चिकित्सा क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने दशकों तक मरीजों की सेवा की और चिकित्सा शिक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

लखनऊ, 26 जनवरी 2026:

लखनऊ के जाने माने पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रसाद को चिकित्सा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने रेस्परेटरी मेडिसिन में दशकों तक सेवा देकर लाखों मरीजों को नया जीवन दिया है। यह सम्मान न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे देश के चिकित्सा जगत के लिए गर्व की बात है। आइए विस्तार से जानते हैं यहां तक कैसे पहुंची इनकी यात्रा…

बस्ती से लखनऊ तक का सफर

डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 17 फरवरी 1950 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के मुंडेवा गांव में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले डॉ. प्रसाद ने मेहनत और लगन के बल पर चिकित्सा जगत में ऊंचा मुकाम हासिल किया। आज वे देश के बड़े पल्मोनोलॉजिस्ट के रूप में पहचाने जाते हैं।

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केजीएमयू से शुरू हुई मेडिकल यात्रा

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 1974 में केजीएमयू लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1979 में टीबी और चेस्ट रोग में एमडी की उपाधि हासिल की। पढ़ाई के बाद वे केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष बने और लंबे समय तक वहां सेवाएं दीं। उन्होंने केजीएमयू की वर्तमान कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद को भी पढ़ाया है।

बड़े संस्थानों में निभाई अहम जिम्मेदारी

डॉ. प्रसाद दिल्ली स्थित पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे सैफई मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर पद पर भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान समय में वे एरा मेडिकल कॉलेज लखनऊ में प्रोफेसर, मेडिकल शिक्षा के निदेशक और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।

लाखों मरीजों का किया इलाज

डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम 400 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित हैं, जिन्हें 16 हजार से ज्यादा लोग पढ़ चुके हैं। उन्होंने अपने करियर में पांच लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया है। वे देश में पल्मोनरी मेडिसिन के छात्रों के लिए एक मार्गदर्शक माने जाते हैं और एक लोकप्रिय चिकित्सा शिक्षक भी हैं।

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टीबी उन्मूलन में भी अहम जिम्मेदारी

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अब तक 12 किताबें लिखी हैं, जिनमें से चार किताबें टीबी पर आधारित हैं। वे राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के नेशनल टास्क फोर्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा वे अमेरिकन कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन के अंतरराष्ट्रीय गवर्नर रह चुके हैं और देश की सभी पांच वैज्ञानिक परिषदों के अध्यक्ष बनने का गौरव भी उन्हें प्राप्त है।

50 से ज्यादा सम्मानों से हो चुके हैं सम्मानित

डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अब तक 50 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। वर्ष 2016 में उन्हें डॉ. बीसी रॉय अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें विज्ञान गौरव पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। पद्मश्री 2026 उनके जीवन भर के समर्पण और सेवा का सबसे बड़ा सम्मान माना जा रहा है।

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