लखनऊ, 12 मई 2026:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने की खरीद कम करने, विदेश यात्राओं में कटौती, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने और वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को निशाने पर ले रहा है। इसी क्रम में बसपा प्रमुख एवं यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ जारी युद्ध और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट की आशंका ने भारत की आर्थिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की जनता से संयम बरतने की अपील यह संकेत देती है कि आने वाले समय में पेट्रोलियम पदार्थों के साथ-साथ आर्थिक संकट भी और गहरा सकता है।
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध जारी युद्ध समाप्ति की अनिश्चितता के कारण ख़ासकर ऊर्जा संकट व विदेशी मुद्रा भण्डार की चिन्ताओं के मद्देनज़र मा. प्रधानमंत्री द्वारा देश के लोगों से ’संयम’ बरतने की गयी अपीलों से यह साबित है कि भारत के समक्ष संकट केवल पेट्रोल, डीज़ल, रसोई…
— Mayawati (@Mayawati) May 12, 2026
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि देश की करोड़ों जनता पहले ही कोरोना काल के बाद बेरोजगारी, महंगाई और रोजी-रोटी के संकट से जूझ रही है। ऐसे में आम लोगों से और अधिक त्याग व संयम की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश की लगभग सौ करोड़ गरीब और मेहनतकश आबादी के पास अब खोने को कुछ खास बचा ही नहीं है।
मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से गरीब परिवारों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारों को जनता पर बोझ डालने के बजाय खुद बेहतर आर्थिक प्रबंधन और राहत योजनाओं के जरिए लोगों का सहारा बनना चाहिए।
प्रधानमंत्री की अपील और मायावती के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे आर्थिक चुनौतियों की स्वीकारोक्ति बता रहा है तो दूसरी तरफ भाजपा इसे वैश्विक संकट के बीच जिम्मेदार नागरिक भागीदारी की अपील करार दे रही है।






