लखनऊ, 12 मई 2026:
नोएडा समेत देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे मजदूर आंदोलनों पर कथित पुलिस दमन और भाकपा (माले) व एक्टू नेताओं की नजरबंदी के विरोध में मंगलवार को राजधानी लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन हुआ। भाकपा (माले) और एक्टू कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार मजदूरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की बिना शर्त रिहाई, फर्जी मुकदमों की वापसी और मजदूर आंदोलनों पर दमन रोकने की मांग उठाई।
यह प्रदर्शन राष्ट्रीय मजदूर महासंघों और एक्टू द्वारा आहूत राष्ट्रीय एकजुटता दिवस के तहत आयोजित किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूर, छात्र, महिला संगठन और वामपंथी कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि 10 मई को एक्टू के प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने प्रदेश के 18 से अधिक जिलों में नेताओं को घरों में नजरबंद किया, रास्तों में रोका और कई जगह धमकाया।
वक्ताओं ने कहा कि महाराजगंज, अयोध्या, सीतापुर, पीलीभीत, रायबरेली, गोंडा, अंबेडकरनगर, सहारनपुर, बस्ती, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, गाजीपुर और जालौन समेत कई जिलों में पुलिस ने कार्रवाई की। वाराणसी में पार्टी जिला सचिव को रेलवे स्टेशन से हिरासत में लेकर घर पहुंचा दिया गया, जबकि कई जिलों में नेताओं को घर से बाहर तक नहीं निकलने दिया गया।

भाकपा (माले) के लखनऊ प्रभारी रमेश सिंह सेंगर ने आरोप लगाया कि सरकार मजदूरों की आवाज को पुलिस बल के जरिए कुचलना चाहती है, लेकिन दमन से आंदोलन कमजोर नहीं होंगे बल्कि और व्यापक बनेंगे। एक्टू लखनऊ सचिव मधुसूदन मगन ने कहा कि नोएडा के मजदूर सम्मानजनक वेतन, आठ घंटे काम और श्रम अधिकारों की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार बातचीत की जगह गिरफ्तारियां कर रही है।
राज्य कमेटी सदस्य राधेश्याम मौर्य ने कहा कि नेताओं की नजरबंदी यह साबित करती है कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध से डर रही है। वहीं एक्टू नेता कमला गौतम ने कहा कि मजदूरों ने लंबे संघर्ष और शहादतों के बाद अपने अधिकार हासिल किए हैं, जिन्हें लेबर कोड और दमन के जरिए छीना नहीं जा सकता।
प्रदर्शन में राजीव गुप्ता, सरोजिनी बिष्ट, रामसेवक, रमेश शर्मा, शांतम, हर्ष, सम्विधा, नीरज, आलम अंसारी, सतीश राव और रामचंद्र समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मजदूर आंदोलनों के खिलाफ दमन जारी रहा तो संघर्ष और तेज किया जाएगा।






