लखनऊ, 17 मई 2026:
यूपी अब सिर्फ देश का सबसे बड़ा आबादी वाला राज्य नहीं बल्कि भारत की नई लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन ताकत बनकर उभर रहा है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग नेटवर्क का ऐसा जाल बिछाया जा रहा है। इसने प्रदेश को निवेश और औद्योगिक विकास का नया इंजन बना दिया है। सीएम योगी के नेतृत्व में विकसित हो रहा यह मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अब यूपी की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे रहा है।
इसी बदलाव का असर है कि प्रतिष्ठित लीड्स 2025 रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को ‘एग्जम्पलर’ श्रेणी में स्थान मिला है। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स सेवाओं, डिजिटल सिस्टम और रेगुलेटरी वातावरण जैसे प्रमुख मानकों पर यूपी का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि सड़क, रेल और एयर कनेक्टिविटी में हुए बड़े सुधारों ने प्रदेश को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे लॉजिस्टिक्स हब में शामिल कर दिया है।
प्रदेश में विकसित पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे अब औद्योगिक विकास की रीढ़ बनते जा रहे हैं। इन कॉरिडोरों ने पूर्वी, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दिल्ली-एनसीआर और बड़े औद्योगिक शहरों से सीधे जोड़ दिया है। इससे माल परिवहन की गति बढ़ी है और उद्योगों की सप्लाई चेन लागत में भी कमी आई है।

यूपी की रणनीतिक ताकत को ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने और मजबूत किया है। ग्रेटर नोएडा के दादरी में 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित हो रहा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब उत्तर भारत का सबसे बड़ा कार्गो और कंटेनर केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं बोराकी, कानपुर, गोरखपुर और टप्पल-बजना में भी आधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के किनारे मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एवं लॉजिस्टिक क्लस्टर बसाने की तैयारी है। इससे प्रदेश में वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स, फूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट आधारित उद्योगों को नई ताकत मिलेगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर भी उत्तर भारत के सबसे बड़े एविएशन और कार्गो गेटवे के रूप में उभर रहा है। वहीं वाराणसी मल्टीमॉडल टर्मिनल और इनलैंड वाटरवे नेटवर्क नदी आधारित लॉजिस्टिक्स को नई पहचान दे रहे हैं। सरकार का दावा है कि ‘निवेश मित्र’ सिंगल विंडो सिस्टम और डिजिटल प्लानिंग मॉडल के जरिए हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी दी जा रही है। साफ है कि योगी सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल अब यूपी को देश की भविष्य की सप्लाई चेन राजधानी बनाने की दिशा में आगे बढ़ा चुका है।






