लखनऊ, 18 मई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ की यातायात व्यवस्था को नई रफ्तार देने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई यूपी कैबिनेट बैठक में लखनऊ मेट्रो परियोजना फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से बसंतकुंज) के लिए भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी गई।
कैबिनेट के इस फैसले के साथ अब राजधानी में मेट्रो विस्तार परियोजना को औपचारिक गति मिल गई है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि परियोजना की डीपीआर को पहले ही कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी थी। अब 5801.05 करोड़ रुपये की अनुमोदित लागत पर सहमति प्रदान कर दी गई है।

सरकार के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत भागीदारी होगी। चारबाग से बसंतकुंज तक बनने वाला ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर राजधानी के ट्रैफिक दबाव को कम करने के साथ नागरिकों को आधुनिक, सुरक्षित और सुगम सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा। माना जा रहा है कि इस कॉरिडोर के शुरू होने से शहर के कई प्रमुख इलाकों के बीच आवागमन आसान और तेज होगा।
गौरतलब है कि लखनऊ मेट्रो फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की डीपीआर को 5 मार्च 2024 को हुई कैबिनेट बैठक में स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 3 सितंबर 2025 को 5801.05 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को अंतिम मंजूरी दी थी।
केंद्र सरकार ने अपनी स्वीकृति में स्पष्ट किया था कि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्र, राज्य और यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के बीच त्रिपक्षीय एमओयू अनिवार्य होगा। अब योगी कैबिनेट द्वारा एमओयू प्रारूप को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।






