राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 18 मई 2026:
टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ उत्तराखंड के जूनियर हाईस्कूल शिक्षक सोमवार को सड़कों पर उतर आए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर शिक्षकों ने कहा कि यदि पुराने शिक्षकों पर भी टीईटी पास करने की शर्त लागू की गई तो बड़ी संख्या में उनकी सेवाएं खतरे में पड़ सकती हैं।
उत्तराखंड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। वहां पहुंचकर उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और जिलाधिकारी के जरिए मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को 13 सूत्रीय मांगपत्र भेजा।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के अपने फैसले में शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य माना है। इस आदेश के बाद राज्य के करीब आधे शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि लगभग 50 प्रतिशत शिक्षक अब तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं। उनके सामने यह शर्त पूरी करने के लिए केवल एक वर्ष का समय बचा है।

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना था कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है जो 20 से 25 वर्ष से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। नियुक्ति के समय उन्होंने उस दौर की सभी जरूरी शैक्षणिक योग्यताएं पूरी की थीं। ऐसे में वर्षों बाद नई शर्त लागू करना न सिर्फ अव्यावहारिक है, बल्कि उनके लंबे सेवाकाल को भी संकट में डाल सकता है।
शिक्षकों ने मांग की कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए। इसके लिए अध्यादेश लाकर स्पष्ट कानून बनाया जाए, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रह सके। संघ के जिलाध्यक्ष सूरज मंद्रवाल ने कहा कि यदि जल्द ठोस फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल सिंह सिंधवाल, महामंत्री अश्विनी कुमार भट्ट, कोषाध्यक्ष सुरक्षा चौहान, वरिष्ठ संयुक्त मंत्री अनूप कुमार भट्ट, पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष सतीश घिल्डियाल व अन्य शिक्षक नेता मौजूद रहे।






