Uttar Pradesh

UP के स्कूलों में फ्यूचर क्लासरूम की एंट्री… AI, रोबोटिक्स और 3D प्रिंटिंग सीखेंगे छात्र

निजी कंपनी के साथ सरकार का ऐतिहासिक समझौता, 75 जिलों के विद्यार्थियों को AI, ड्रोन, 3D प्रिंटिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की मिलेगी अत्याधुनिक ट्रेनिंग

लखनऊ, 24 मई 2026:

यूपी सरकार ने स्कूली शिक्षा को तकनीक और रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र किताबों तक सीमित न रहकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और 3डी प्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त करेंगे।

इस मकसद उद्देश्य से प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में समग्र शिक्षा (माध्यमिक) एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा नेल्को लिमिटेड (टाटा एंटरप्राइज) और अन्य अग्रणी औद्योगिक समूहों के साथ 600 राजकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अत्याधुनिक ड्रीम लैब्स स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की उपस्थिति में हुआ। पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि यह परियोजना के साथ प्रदेश के युवाओं के भविष्य में किया गया निवेश है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री 4.0 के दौर में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी कौशलों से लैस करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि यह पहल व्यावसायिक शिक्षा को नई दिशा देगी। उन्होंने हब एवं स्पोक मॉडल के प्रभावी संचालन, मशीनरी की गुणवत्ता, प्रशिक्षकों की दक्षता और परिणाम आधारित निगरानी पर विशेष जोर दिया। परियोजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में 600 विद्यालयों को शामिल किया गया है। इनमें 150 हब और 450 स्पोक विद्यालय होंगे।

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पहले चरण में 72 विद्यालय, दूसरे चरण में 144 और तीसरे चरण में 384 विद्यालयों में ड्रीम लैब्स स्थापित की जाएंगी। इन लैब्स में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को AI, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा और ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप यह परियोजना विद्यार्थियों में नवाचार, तकनीकी दक्षता और उद्यमिता कौशल विकसित करेगी। पांच वर्षीय साझेदारी मॉडल पर आधारित इस योजना में उद्योग विशेषज्ञ विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को प्रशिक्षित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश को कुशल, आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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