न्यूज डेस्क, 25 मई 2026:
आज के डिजिटल युग में टेक्नोलॉजी ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। स्मार्टफोन, हाई-स्पीड इंटरनेट और हाई-ग्राफिक्स वाले गेम्स ने मनोरंजन को एक नया रूप दिया है। बच्चों से लेकर युवाओं तक गेमिंग का क्रेज तेजी से बढ़ा है। मनोरंजन के रूप में गेम खेलना गलत नहीं है लेकिन जब यह मनोरंजन एक मजबूरी या लत बन जाता है तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी गेमिंग डिसऑर्डर को एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के रूप में मान्यता दी है।
आकर्षक और लुभावने ग्राफिक्स का होता है इस्तेमाल
गेमिंग की लत के मुख्य कारण गेमिंग कंपनियों द्वारा आधुनिक गेम्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे बेहद आकर्षक और रिवॉर्डिंग (पुरस्कार देने वाले) लगें। खेल में मिलने वाले वर्चुअल कॉइंस, नए लेवल्स और दोस्तों के साथ ऑनलाइन मुकाबला करने की सुविधा खिलाड़ियों के दिमाग में ‘डोपामाइन’ (खुशी का हार्मोन) रिलीज करती है। इसके अलावा कई बार लोग असल जिंदगी के तनाव, अकेलेपन या पढ़ाई के दबाव से बचने के लिए भी गेमिंग की आभासी दुनिया का सहारा लेते हैं। धीरे-धीरे यह आदत एक गहरे एडिक्शन में बदल जाती है।

आभासी दुनिया असल जिंदगी से कर रही दूर
गेमिंग की लत से व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ता है। घंटों एक ही जगह बैठकर गेम खेलने से आंखों की रोशनी कमजोर होना, पीठ दर्द, मोटापा और नींद की कमी (अनिद्रा) जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गेम न खेल पाने पर व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, तनाव और डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। वे असल दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं। गेमिंग की लत के कारण छात्र अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते जिससे उनका शैक्षणिक प्रदर्शन गिर जाता है। कामकाजी लोग अपने करियर और पारिवारिक जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करने लगते हैं।
आउटडोर गेम्स को दें प्राथमिकता
इस आधुनिक समस्या से निपटने के लिए जागरूक होना और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। स्क्रीन टाइम को सीमित करें। रोजाना गेम खेलने का एक निश्चित समय तय करें कि कितना समय गेम को देना है और उसका सख्ती से पालन करें।बच्चों और युवाओं को आउटडोर गेम्स जैसे क्रिकेट, फुटबॉल एवं साइकिल चलाने या जिम जाने के लिए प्रेरित करें। इसके साथ ही माता-पिता को अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए और उनके व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए। गैजेट्स की जगह उनके साथ बोर्ड गेम्स खेलें या बातचीत करें।

गेमिंग को सिर्फ सीमित मनोरंजन की नजर से देखें
हफ्ते में कम से कम एक दिन ऐसा रखें जब परिवार का कोई भी सदस्य गेमिंग या सोशल मीडिया का उपयोग न करे। इससे काफी मदद मिलेगी। गैजेट्स और वीडियो गेम्स आज के समय की जरूरत हो सकते हैं लेकिन इन्हें अपने जीवन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। तकनीक का उपयोग विकास के लिए होना चाहिए न कि विनाश के लिए। गेमिंग को केवल एक सीमित मनोरंजन के रूप में ही देखा जाना चाहिए ताकि हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।






