लखनऊ, 27 मई 2026:
यूपी सरकार की संवेदनशील पहल और महिला कल्याण विभाग की सतत कोशिशों ने दो बिछड़े बच्चों की जिंदगी में फिर से खुशियां लौटा दीं। वर्षों से अपने परिवार से दूर रह रहे मासूम बच्चों को आखिरकार उनके अपनों का साथ मिल गया। इस भावुक मिलन ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमती ने बताया कि बहराइच निवासी एक अल्प मानसिक दिव्यांग बालक करीब तीन वर्ष पहले भटकते हुए अपने परिवार से बिछड़ गया था। मानसिक स्थिति सामान्य न होने के कारण वह अपना घर या परिजनों की जानकारी नहीं दे पा रहा था। इसके बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के निर्देश पर उसे राजकीय बाल गृह (बालक) में संरक्षण दिया गया। बाल गृह प्रशासन ने उसकी देखभाल, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और काउंसलिंग की जिम्मेदारी निभाई।
इसी दौरान महिला कल्याण विभाग और बाल गृह प्रशासन ने बच्चे के परिवार को तलाशने के प्रयास तेज किए। तकनीकी सहायता और आधार कार्ड रिकॉर्ड की मदद से आखिरकार बच्चे के घर का पता लगाया गया। बायोमीट्रिक प्रक्रिया के दौरान उसकी उंगलियों के स्कैन से पहले से बना आधार कार्ड सामने आया। इसने परिवार तक पहुंचने का रास्ता खोल दिया।
इस क्रम में वर्षों बाद बच्चे और उसके परिजनों की मोबाइल पर बात कराई गई तो भावनाओं का बांध टूट पड़ा। बेटे की आवाज सुनते ही परिवार फफक पड़ा। दूसरी तरफ बालक भी अपनों से बात कर भावुक हो गया।
वहीं मोहनलालगंज क्षेत्र के 14 वर्षीय मूकबधिर बालक को भी महिला कल्याण विभाग के प्रयासों से उसके परिवार तक पहुंचाया गया। लगातार काउंसलिंग और खोजबीन के बाद जब परिजन बाल गृह पहुंचे तो बच्चे और परिवार ने एक-दूसरे को पहचान लिया। जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर बालक को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
योगी सरकार के मार्गदर्शन में संचालित बाल गृह संस्थाएं जरूरतमंद और विशेष देखरेख वाले बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय बन चुकी हैं। इनमें उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक परामर्श और संस्कारयुक्त वातावरण भी उपलब्ध कराया जा रहा है।






