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POCSO एक्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ‘सुप्रीम’ राहत… अग्रिम जमानत बरकरार

इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिली प्री-अरेस्ट बेल को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की तरफ से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार किया

नई दिल्ली, 29 मई 2026:

POCSO एक्ट से जुड़े मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की तरफ से दी गई उनकी अग्रिम जमानत को बरकरार रखा है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका खारिज कर दी। याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से पहले राहत दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत फिलहाल कायम रहेगी। मामला POCSO एक्ट से जुड़ा होने की वजह से पहले से चर्चा में था। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी कानूनी राहत मिल गई है।

बता दें शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया था कि माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने नाबालिग बटुकों का यौन शोषण किया। प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर 21 फरवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया।

25 मार्च 2026 को न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने एफआईआर में कई विसंगतियां पाईं। पीड़ितों ने घटना 18 जनवरी को बताई, जबकि शिकायतकर्ता ने पुलिस को 24 जनवरी को सूचना दी। देरी का कारण पूजा-यज्ञ बताया गया, जिस पर कोर्ट ने सवाल उठाए। चिकित्सा रिपोर्ट में भी नाबालिगों के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले थे।

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