राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 29 मई 2026ः
उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के यमकेश्वर क्षेत्र में स्थित राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में एक असिस्टेंट प्रोफेसर को फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करना भारी पड़ गया। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। प्रोफेसर की लगभग 14 साल पहले महाविद्यालय में नियुक्ति हुई थी। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बर्खास्त करने को मंजूरी दी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार डॉ. उमेश त्यागी की नियुक्ति कला संकाय में वर्ष 2012 में असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास के पद पर हुई थी। नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की सत्यता को लेकर शिकायत मिलने पर उच्च स्तरीय जांच कराई गई। जांच में बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की मार्कशीटों में विसंगतियां सामने आईं।
सर्टिफिकेट्स का वेरिफिकेशन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से कराया गया, लेकिन शैक्षणिक प्रमाण पत्र विश्वविद्यालय से मेल नहीं खाए। जांच के दौरान डॉ. त्यागी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया, लेकिन वह कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गरिमा और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का छल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त करना गंभीर अपराध है। भविष्य में भी यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।






