एमएम खान
मोहनलालगंज (लखनऊ), 2 मार्च 2026:
राजधानी लखनऊ में निगोहां के नदौली गांव में होलिका दहन के दिन लगने वाला विशाल मेला इस बार भी भारी उत्साह और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। लखनऊ-रायबरेली राजमार्ग से मात्र 5 किलोमीटर दूर बसे इस गांव की होलिका दहन की परंपरा दूर-दूर तक प्रसिद्ध है, जहां हजारों श्रद्धालु न केवल होलिका दहन मनाने बल्कि गंभीर बीमारियों से मुक्ति पाने की आशा लेकर पहुंचते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
मेले में अप्रिय घटना न हो इसके प्रशासन ने पहले से ही कड़े इंतजाम किए हैं। भारी पुलिस बल के साथ पीएसी की टीमें तैनात रहेंगी। दमकल की कई गाड़ियां भी मौके पर मुस्तैद रहेंगी ताकि आग लगने या किसी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इसके अलावा, मेले के पूरे क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी, जिससे हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके। एसओ निगोहां अनुज कुमार तिवारी ने बताया कि राजमार्ग से नदौली गांव तक जाने वाली सड़क पर पुलिस तैनात रहेगी। सुरक्षा की हर संभव व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसमें पीएसी बल और फायर ब्रिगेड की टीमें शामिल हैं। मेला समिति की तरफ से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

क्यों है नदौली की होलिका दहन इतनी प्रसिद्ध?
इस मेले की खासियत यह है कि यहां होलिका दहन को देखने या इसमें भाग लेने से मिर्गी, टीबी, चर्म रोग, अस्थमा (दमा), पीलिया और हिस्टीरिया जैसी गंभीर बीमारियों से छुटकारा मिलने की लोक आस्था है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आईपी सिंह के अनुसार, यह परंपरा लगभग 500 वर्षों से चली आ रही है। होलिका दहन की रात मेले में दर्जनों कैंप लगते हैं जहां सैकड़ों लोग लाइन लगाकर दवा लेते हैं। उन्होंने बताया कि दूर-दराज के जिलों से हजारों लोग यहां आते हैं, खासकर उन दवाओं के लिए जो मुफ्त में वितरित की जाती हैं। लोग दवा लेने के बाद स्नान करते हैं और गीले कपड़ों में होलिका के चारों ओर घूमते हैं, फिर कपड़े बदलकर उन्हें होलिका में जला देते हैं। मान्यता है कि इससे बीमारी का पता चल जाता है और आयुर्वेदिक दवा से स्थायी राहत मिलती है।
विज्ञान पर आस्था भारी
मेले में हिंदू और मुस्लिम परिवार के लोग सदियों से भाग हिस्सा लेते आए हैं। वे मिलकर दमा, मिर्गी, हिस्टीरिया और पीलिया जैसी बीमारियों की दवा वितरित करते हैं। यह आस्था का ऐसा केंद्र बन गया है जहां धर्म से ऊपर उठकर लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं।

कैसे होता है इलाज
होलिका दहन वाली रात को दवा देने वाले लोग टेंट लगाकर पहले लोगों को पर्चा देते हैं, फिर पर्चे के साथ में मिट्टी का घड़ा, बनारसी पान जिसमें जड़ी बूटी दी जाती है, उस घड़े में पानी भरकर पहले लोग नहाते हैं उसके बाद गीले कपड़ों में होलिका के चारों ओर 7 चक्कर लगाते हैं, जिसके बाद वह कपड़े बदल कर कपड़ों को होलिका में जला देते है। उनका मानना है दमा, मिर्गी, आदि जटिल बीमारी होलिका दहन के चक्कर लगाते हैं तो बीमारी का रूप पता चल जाता है और उसके बाद रोगियों को बांग्ला, बनारसी पान के साथ आयुर्वेदिक दवा दी जाती है।






