Uttar Pradesh

पर्यटकों को भाएगा सामौर बाबा महोत्सव…सात दिन चलेगा आस्था व लोक संस्कृति का उत्सव

फिरोजाबाद स्थित धाम में देवी जागरण से कवि सम्मेलन तक रोज शाम मशहूर हस्तियों से सजेगा मंच, लक्खा के भजन गूंजेंगे, सुनील जोगी सुनाएंगे कविता, रुद्राक्ष बैंड देगा शानदार प्रस्तुति

लखनऊ, 2 मार्च 2026:

फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज क्षेत्र स्थित करहरा गांव में 5 से 11 मार्च तक सात दिवसीय सामौर बाबा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। सामौर बाबा धाम परिसर में होने वाला यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति और कला का बड़ा संगम बनेगा। महोत्सव का आयोजन जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद, जिला प्रशासन और सामौर बाबा धाम ट्रस्ट के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि महोत्सव के दौरान देवी जागरण, कवि सम्मेलन, शिव नृत्य नाटिका, शिव डमरू नृत्य और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। कार्यक्रम रोज शाम सात बजे से शुरू होंगे। आयोजन का मकसद स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बड़ा मंच देना है।

भजन व कविता से सजेगी महफिल

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महोत्सव में 7 मार्च को होने वाले देवी जागरण में मशहूर भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा अपनी प्रस्तुति देंगे। 08 मार्च को विशाल कवि सम्मेलन होगा, जिसमें सुनील जोगी सहित कई चर्चित कवि हास्य, व्यंग्य और ओज की रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखेंगे। कार्यक्रम में हेमंत पांडेय, राम भदावर, गौरव चौहान, मुकेश मणिकांचन, पद्मिनी शर्मा और योगिता चौहान भी मंच साझा करेंगे।

शिव नृत्य और बैंड प्रस्तुति से बनेगा भक्तिमय माहौल

9 मार्च को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की खास श्रृंखला होगी। वाराणसी की दिव्या श्रीवास्तव टीम शिव नृत्य नाटिका पेश करेगी, जबकि प्रयागराज का रुद्राक्ष बैंड संगीतमय प्रस्तुति देगा। उत्तराखंड का नाद समूह शिव डमरू नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को अलग रंग देगा। 10 मार्च को भजन संध्या में कन्हैया मित्तल की प्रस्तुति श्रद्धालुओं को भावुक माहौल में ले जाएगी।

पर्यटन और स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच

मंत्री के अनुसार ऐसे आयोजन क्षेत्रीय पर्यटन को नई पहचान देते हैं और स्थानीय कलाकारों, साहित्यकारों व युवाओं को आगे आने का मौका मिलता है। सामौर बाबा धाम को आस्था, संस्कृति और पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह महोत्सव अहम कदम माना जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि सात दिनों तक चलने वाला यह उत्सव सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि इलाके की लोक परंपरा, संगीत, साहित्य और सांस्कृतिक रंगों को एक साथ देखने का मौका भी देगा।

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