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CM योगी का बड़ा दावा : UP में तीन गुना बढ़ी प्रति व्यक्ति आय, MSME व सहकारिता बने विकास की रीढ़

मुख्यमंत्री ने किया राज्य ऋण संगोष्ठी का शुभारंभ, कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में न विकास था, न रोजगार के अवसर, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना के जरिए एमएसएमई सेक्टर को मिला नया जीवन

लखनऊ, 5 फरवरी 2026:

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित लोक भवन में गुरुवार को आयोजित 2026-27 की राज्य ऋण संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए प्रदेश की आर्थिक प्रगति का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में तेजी से उभर रहा है और इसमें उत्तर प्रदेश की भूमिका निर्णायक होती जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार है जब देश में सहकारिता को एक स्वतंत्र मंत्रालय के रूप में मजबूती मिली है। एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को हर स्तर पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिल रहा है। केंद्रीय बजट में ‘लखपति दीदी’ योजना को ‘शी-मार्ट’ से जोड़कर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की घोषणा की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए ‘शी-मार्ट’ की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा यूनियन बजट में शामिल की गई है।

सीएम योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति किसी से छिपी नहीं थी। न विकास था, न रोजगार के अवसर। सहकारिता क्षेत्र पर माफियाओं का कब्जा था और 16 जिला सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक ने डिफॉल्टर घोषित कर दिया था। आज स्थिति यह है कि इन 16 में से 15 बैंक लाभ में आ चुके हैं। शेष एक को भी लाभ में लाने की प्रक्रिया जारी है।

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उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर लगभग बंदी के कगार पर था। कारीगर, हस्तशिल्पी और छोटे उद्यमी निराश होकर पलायन कर रहे थे। सरकार ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ योजना के जरिए इस सेक्टर को नया जीवन दिया। आज प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स सक्रिय हैं। लगभग 3 करोड़ परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जो एमएसएमई सेक्टर को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर देता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2016 में प्रदेश का क्रेडिट-डेबिट रेशियो मात्र 43 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 61 प्रतिशत हो चुका है। इस वित्तीय वर्ष में इसे 62 प्रतिशत और 2026-27 में 65 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि नीयत साफ हो तो परिणाम भी स्पष्ट होते हैं। 2016 में जहां प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय ₹43,000 थी, वहीं आज यह बढ़कर ₹1,20,000 तक पहुंच चुकी है। यह लगभग तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है।

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