Lucknow City

Ram Mandir : चंदा-चढ़ावा घोटाले पर कांग्रेस का BJP पर बड़ा हमला, पूछा- सरकार क्यों दे रही चोरों को मौन समर्थन?

प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने जयराम रमेश के तीन सवालों को दोहराकर सरकार को घेरा, पहली SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक तक पहुंचने और जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

लखनऊ, 7 नवंबर 2026:

राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में कथित चोरी का मामला एक बार फिर सियासी तूल पकड़ने लगा है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने शनिवार को इस मामले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर दोनों नेता चंदा-चढ़ावा चोरी के आरोपों पर मौन साधकर कथित दोषियों को मूक समर्थन क्यों दे रहे हैं? पहले दिन से ही इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश क्यों की जा रही है?

प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश की ओर से उठाए गए तीन गंभीर सवालों को सामने रखते हुए कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी ही जांच से जुड़े ऐसे तथ्य रखे हैं जिनसे पूरे मामले में संदेह गहरा गया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।

पहली SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक तक कैसे पहुंची?

आराधना मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को तीन सदस्यीय पहली SIT गठित की थी। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई। संजय प्रसाद के ट्रस्ट से पदेन सदस्य के रूप में जुड़े होने की बात भी सामने आई है।

ये भी पढ़ें:

इसके बाद 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में रिपोर्ट पर चर्चा हुई। बैठक के बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ट्रस्ट के लोगों को विश्वासघात से मुक्त बताया और चंपत राय के चरित्र पर भरोसा जताते हुए उनकी सेवाओं की सराहना की।

Advertisement

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब दूसरी SIT की रिपोर्ट जांच जारी होने के कारण गोपनीय रखी गई तो पहली SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक तक कैसे पहुंच गई? क्या जांच के दायरे में आने वाले पदाधिकारियों तक रिपोर्ट पहुंचाना हितों के टकराव और जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल नहीं खड़े करता?

दूसरी SIT और फॉरेंसिक ऑडिट के बावजूद जांच खत्म करने की जल्दबाजी क्यों?

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि गत 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद IG किरण एस के नेतृत्व में दूसरी SIT गठित हुई जिसमें फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया। इस SIT की प्रगति रिपोर्ट 17 अगस्त को राज्य सरकार ने गोपनीय रिपोर्ट के रूप में सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी।

उन्होंने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दूसरी SIT और फॉरेंसिक ऑडिटर की जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार अपनी जांच पूरी बताकर मामले को समाप्त करने की कोशिश क्यों कर रही है? आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होना ही क्या पर्याप्त है? ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका और पूरे वित्तीय प्रबंधन की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

ये भी पढ़ें  राष्ट्रपति ने की राम यंत्र की स्थापना, कहा...देव व देश भक्ति, दोनों का मार्ग एक, योगी बोले-पहले आस्था को कहते थे अंधविश्वास

Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
Secret Link