
लखनऊ, 26 सितंबर 2026:
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के एसजीपीजीआई में निधन हो गया। वह कई दिनों से संस्थान के पोस्टऑपरेटिव आईसीयू में भर्ती थे। पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमान ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप समेत कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें थीं। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया था।
रामगोविंद चौधरी के निधन की खबर मिलते ही सपा में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में सपा नेता, कार्यकर्ता, समर्थक और उनके परिचित पीजीआई पहुंचे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया। अखिलेश यादव ने कहा, ‘समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का निधन, अत्यंत दुःखद!’ उन्होंने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस कठिन समय में संबल मिलने की कामना की।
छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर
बलिया जिले के गोसाईंपुर गांव से आने वाले रामगोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1953 को हुआ था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की और वकालत शुरू की लेकिन उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से ही आकार लेने लगा। वर्ष 1971-72 में वह बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय के महामंत्री बने और बाद में कॉलेज अध्यक्ष भी चुने गए।

राजनीति में उनकी पहली बड़ी कामयाबी 1977 के विधानसभा चुनाव में मिली। उन्होंने चिलकहर विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में कदम रखा। इसके बाद 1980 और 1985 में भी जीत हासिल की। 1989 में जनता दल के टिकट पर उन्होंने लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीता। 1991 में भी वह चिलकहर से जीतकर पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे।
मुलायम सरकार में मंत्री, फिर लंबा सियासी उतार-चढ़ाव
दिसंबर 1990 से 1991 के बीच रामगोविंद चौधरी ने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। हालांकि इसके बाद उनके राजनीतिक सफर में उतार-चढ़ाव भी आए। 1993 में उन्हें चिलकहर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। 1996 में उन्होंने चंद्रशेखर की समाजवादी जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे।
इसके बाद उन्होंने फिर वापसी की। 2002 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्हें समाजवादी पार्टी के विधानमंडल दल का नेता चुना गया। 2007 में चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने राजनीति में अपनी सक्रियता बनाए रखी और 2012 में फिर विधानसभा पहुंचे।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राम गोविंद चौधरी जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि ! pic.twitter.com/8GeCP8UcpT
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 25, 2026
अखिलेश सरकार में मंत्री से नेता प्रतिपक्ष तक
2012 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में बनी सरकार में रामगोविंद चौधरी को बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी मिली। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बांसडीह सीट से फिर जीत दर्ज की। इसके बाद विधानसभा में उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई।
रामगोविंद चौधरी का करीब पांच दशक लंबा राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर विधायक, मंत्री, विधानमंडल दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचा। वह सपा के उन वरिष्ठ नेताओं में रहे जिनका राजनीतिक जीवन पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के दौर से लेकर अखिलेश यादव के नेतृत्व तक फैला रहा। उनके निधन से समाजवादी पार्टी ने अपने एक अनुभवी और लंबे समय तक सक्रिय रहे वरिष्ठ नेता को खो दिया।






