Diwali-Chhath पर यूपी के अस्पताल अलर्ट, 24 घंटे इमरजेंसी सेवा, डॉक्टर्स को ये निर्देश
आगजनी, सड़क हादसों और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए जारी किए गए निर्देश, डॉक्टरों की ड्यूटी से लेकर दवाओं, ऑक्सीजन और बेड तक की व्यवस्था दुरुस्त रखने के आदेश

लखनऊ, 7 नवंबर 2026:
दीपावली और छठ पूजा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए यूपी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखने की तैयारी की है। त्योहारों में पटाखों से आग लगने, झुलसने, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य हादसों की आशंका को देखते हुए प्रदेश के सभी राजकीय एवं स्वशासी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में इमरजेंसी, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू और बर्न यूनिट समेत सभी जीवनरक्षक सेवाएं 24 घंटे सक्रिय रहेंगी।
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण नेहा शर्मा ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, निदेशकों और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों को चिकित्सा सुविधाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं और जरूरी उपकरणों की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार का मकसद है कि त्योहारों के दौरान किसी भी मरीज को तत्काल उपचार मिलने में परेशानी न हो।
इमरजेंसी से बर्न यूनिट तक 24 घंटे अलर्ट
निर्देशों के मुताबिक सभी मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी विभाग, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू, बर्न यूनिट, एनेस्थीसिया, सर्जरी और ऑपरेशन थिएटर चौबीसों घंटे क्रियाशील रखे जाएंगे। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का तत्काल परीक्षण और प्राथमिक उपचार किया जाएगा। गंभीरता के आधार पर इलाज की प्राथमिकता तय करने के साथ अतिरिक्त बेड और चिकित्सा संसाधन भी तैयार रखे जाएंगे।
डॉक्टरों की छुट्टियों और ड्यूटी पर रहेगी नजर
त्योहारों के दौरान डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों का विशेष ड्यूटी रोस्टर तैयार किया जा रहा है। इमरजेंसी, ट्रॉमा, आईसीयू, बर्न यूनिट, ऑर्थोपेडिक्स, मेडिसिन और रेडियोलॉजी समेत जरूरी विभागों में पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मानव संसाधन भी उपलब्ध कराया जाएगा जिससे मरीजों के इलाज में स्टाफ की कमी बाधा न बने।

दवाओं, ऑक्सीजन और उपकरणों का होगा इंतजाम
अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं, इंजेक्शन, ड्रेसिंग सामग्री, स्यूचर, प्लास्टर और आपातकालीन उपचार किट का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा वेंटिलेटर, मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर, सक्शन मशीन और ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता के साथ उनकी कार्यशीलता की जांच भी होगी। ब्लड बैंक से समन्वय कर रक्त और रक्त अवयवों का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया जाएगा।
आगजनी और सामूहिक हादसों से निपटने की तैयारी
मेडिकल कॉलेजों में फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरणों और सुरक्षा प्रणालियों की जांच कराई जाएगी। ऑक्सीजन प्लांट, विद्युत पैनल, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रहेगी। अस्पतालों के निकास मार्ग और सीढ़ियां भी अवरोधमुक्त रखी जाएंगी।
वहीं, सड़क हादसों, आगजनी और भगदड़ जैसी घटनाओं में बड़ी संख्या में घायलों के अस्पताल पहुंचने की स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन योजना अपडेट की जाएगी। ट्रायेज व्यवस्था के तहत घायलों की गंभीरता के अनुसार इलाज की प्राथमिकता तय होगी। गंभीर मरीजों को दूसरे उच्चस्तरीय अस्पतालों में भेजने के लिए एंबुलेंस और रेफरल व्यवस्था भी प्रभावी रखी जाएगी।
लापरवाही या शिथिलता मिलने पर होगी जिम्मेदारी
अस्पतालों में साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण, पेयजल, बिजली, बैकअप पावर और ऑक्सीजन आपूर्ति की नियमित निगरानी होगी। व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही या शिथिलता मिलने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।






