
न्यूज डेस्क, 16 सितंबर 2026:
यूपीआई को लेकर जारी नए फ्रेमवर्क के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब यूपीआई से पेमेंट करने पर आम लोगों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी? करीब 10 साल से मुफ्त डिजिटल पेमेंट की आदत बन चुके करोड़ों यूजर्स के बीच यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि पहली बार बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए MDR यानी Merchant Discount Rate की दरें तय की गई हैं।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR का बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट इस शुल्क की वसूली ग्राहक से न करें। इसके साथ ही यूपीआई ऐप कंपनियों को प्लेटफॉर्म फीस या किसी छिपे हुए चार्ज के जरिए यूजर पर अतिरिक्त बोझ डालने से रोका गया है।
सबसे पहले समझिए P2P पेमेंट है क्या
P2P यानी Person-to-Person पेमेंट का मतलब है एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यूपीआई के जरिए पैसे भेजना। दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के किसी सदस्य को रकम ट्रांसफर करना या किसी परिचित को भुगतान करना इसके उदाहरण हैं।
सरकार के मुताबिक यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 70 फीसदी हिस्सा P2P पेमेंट का है। ऐसे सभी पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। यानी रकम कितनी भी हो P2P यूपीआई ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा।
P2M पेमेंट में क्या बदलेगा?
जब कोई ग्राहक दुकानदार या कारोबारी को यूपीआई से भुगतान करता है तो इसे P2M यानी Person-to-Merchant पेमेंट कहा जाता है। किराने की दुकान, पेट्रोल पंप या किसी अन्य कारोबारी को यूपीआई से किया गया भुगतान इसका उदाहरण है। 2,000 रुपये तक के P2M पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा। यानी ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और मर्चेंट पर भी इस सीमा तक MDR नहीं होगा।
2,000 रुपये से ऊपर पेमेंट पर कितना MDR?
सामान्य बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए 0.4 फीसदी MDR तय किया गया है। उदाहरण के लिए 10,000 रुपये के पेमेंट पर MDR 40 रुपये होगा। लेकिन यहां सबसे अहम बात यह है कि ये 40 रुपये ग्राहक को नहीं देने हैं। MDR मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है। इसे डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी पर लगाया जाता है। सरकार ने इसकी अधिकतम सीमा भी तय की है। 75,000 रुपये तक के पेमेंट पर 0.4 फीसदी के हिसाब से MDR अधिकतम 300 रुपये होगा। 75,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर भी अधिकतम MDR 300 रुपये ही रहेगा।

पेट्रोल, रेलवे और बीमा के लिए अलग नियम
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, पेट्रोल-डीजल और खेती से जुड़े इनपुट जैसे कुछ जरूरी सेक्टरों में अलग व्यवस्था है। 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR तय किया गया है। उदाहरण के लिए 5,000 रुपये का पेट्रोल भुगतान करने पर MDR 5 रुपये होगा लेकिन यह रकम ग्राहक से वसूलने की बात नहीं है।
शेयर-म्यूचुअल फंड में कितना MDR?
म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े यूपीआई पेमेंट पर 0.02 फीसदी MDR तय किया गया है। इसकी अधिकतम सीमा भी 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
फिर यूजर्स को चिंता क्यों?
असल चिंता इस बात को लेकर है कि MDR मर्चेंट को देना है लेकिन क्या कारोबारी इसकी भरपाई किसी दूसरे तरीके से ग्राहक से करने की कोशिश करेंगे? सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए।
सरकार के मुताबिक यूपीआई के करीब 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस नए MDR प्रावधान से प्रभावित नहीं होंगे और करीब 4 फीसदी ट्रांजैक्शन ही इसके दायरे में आएंगे। यह बात स्पष्ट है कि आम यूजर के लिए यूपीआई पेमेंट पर कोई सीधा चार्ज नहीं है। P2P पेमेंट मुफ्त है और 2,000 रुपये तक के P2M पेमेंट पर भी MDR नहीं है। बदलाव मुख्य रूप से कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़ा है।






