
लखनऊ, 3 सितंबर 2026:
यूपी में स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा-ए (H1N1) के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए योगी सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को अलर्ट मोड पर कर दिया है। प्रदेश में अब स्वाइन फ्लू की जांच सभी जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी, मेडिकल कॉलेजों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त कराई जाएगी। अब तक प्रदेश में H1N1 के करीब सात सौ मरीजों की जांज में पुष्टि हो चुकी है। बढ़ते मामलों को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिक प्रभावित जिलों में निगरानी और उपचार व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक और राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संक्रमण के मामलों की समय से पहचान और मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं, जांच की सुविधा और आइसोलेशन बेड उपलब्ध रखने के साथ गंभीर मरीजों के लिए अलग ICU वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए।
बढ़ते मामलों वाले जिलों पर खास नजर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में H1N1 के मामले बढ़ रहे हैं, वहां निगरानी तत्काल बढ़ाई जाए और जरूरत के अनुसार चिकित्सा संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से सघन जांच अभियान चलाकर संभावित मरीजों की पहचान करने को कहा गया है।
अस्पतालों में होगा अलग काउंटर और फ्लू OPD
अस्पतालों में इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीजों के लिए अलग काउंटर और फ्लू ओपीडी की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं। मरीज की स्थिति के अनुसार रेफरल सिस्टम को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि सामान्य लक्षण वाले मरीजों से अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
विशेषज्ञों के अनुसार H1N1 सीजनल इन्फ्लुएंजा का एक प्रकार है। यह मुख्य रूप से खांसी और छींक से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के जरिए फैलता है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना और आंखों में लालिमा शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर विशेष ध्यान देने को कहा है। सामान्य लक्षण वाले मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार घर पर आराम और सेल्फ आइसोलेशन की सलाह दी जाएगी।
ये हो सकते हैं गंभीर स्थिति के संकेत
वहीं, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, अत्यधिक सुस्ती, रक्तचाप कम होना, खून मिला बलगम या नाखूनों का नीला पड़ना गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। बच्चों में लगातार तेज बुखार, खाना न खा पाना, झटके आना, तेज सांस चलना या सांस लेने में परेशानी को भी गंभीर संकेत माना गया है।
दवा और जांच की पर्याप्त व्यवस्था
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ओसेल्टामिविर कैप्सूल और सिरप तथा H1N1 वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता है। जिला अस्पतालों में हेल्प डेस्क, नमूना संग्रह और पृथक फ्लू ओपीडी की व्यवस्था है। मेडिकल कॉलेजों में भी फ्लू हेल्प डेस्क, जांच, दवाओं और आइसोलेशन बेड की सुविधा उपलब्ध है। जांच के लिए पर्याप्त RT-PCR किट भी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई।

SGPGI के निदेशक डॉ. आरके धीमान, KGMU की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद और राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने अपने संस्थानों में उपचार, टेस्टिंग और दवाओं की उपलब्धता की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने H1N1 की रोकथाम और उपचार के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करने तथा टेलिकन्सल्टेशन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही निजी अस्पतालों को निर्धारित शुल्क से अधिक जांच शुल्क नहीं लेने की हिदायत दी।
‘संक्रमण को लेकर लोगों में बढ़ाएं जागरूकता’
योगी ने अधिकारियों से कहा कि संक्रमण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए लेकिन अनावश्यक पैनिक न पैदा हो। भीड़भाड़ वाले स्थानों और अस्पतालों में हाथों की स्वच्छता, खांसी-छींक के दौरान सावधानी और संक्रमण से बचाव के उपायों का व्यापक प्रचार किया जाए। सरकार अब प्रदेश में H1N1 के मामलों पर लगातार नजर रखेगी और किसी भी जिले में संक्रमण बढ़ने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी।






