लखनऊ/सीतापुर, 25 मई 2026:
यूपी सरकार अब नैमिषारण्य को धार्मिक स्थल के साथ वैश्विक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में लखनऊ-सीतापुर मार्ग पर वैदिक थीम पर आधारित दो भव्य तोरण द्वारों के निर्माण की योजना शुरू की गई है। करीब 3.25 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए पहली किश्त के रूप में 2.40 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य इन तोरण द्वारों को सिर्फ प्रवेश मार्ग तक सीमित रखना नहीं है अपितु इन्हें नैमिषारण्य की दिव्यता, वैदिक परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक के रूप में विकसित करना है। परियोजना के तहत पहला तोरण द्वार लखनऊ लिंक रोड और दूसरा सीतापुर लिंक रोड पर बनाया जाएगा जिससे तीर्थ क्षेत्र में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति हो सके।
इन द्वारों का डिजाइन भारतीय मंदिर वास्तुकला की प्रसिद्ध ‘नागर शैली’ पर आधारित होगा। बारीक नक्काशी, ऊर्ध्वाधर संरचना, पवित्र ज्यामिति और प्राचीन मंदिरों जैसी स्थापत्य कला इनकी सबसे बड़ी विशेषता होगी। डिजाइन में वैदिक वास्तुकला के साथ स्थानीय सांस्कृतिक स्वरूप को भी समाहित किया गया है। इससे यह निर्माण धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान दोनों का सशक्त प्रतीक बन सके।

तोरण द्वारों को लाल बलुआ पत्थर जैसी फिनिश में तैयार किया जाएगा। ये भारतीय धार्मिक स्थापत्य की ऐतिहासिक पहचान मानी जाती है। मिट्टी जैसे प्राकृतिक रंग और पारंपरिक डिजाइन पूरे परिसर को आध्यात्मिक आभा प्रदान करेंगे। ऊंचे चौकोर चबूतरे, सजावटी पट्टियां, पतले स्तंभ, धंसे हुए पैनल और मंदिर के गर्भगृह जैसे ताखे इसकी भव्यता को और प्रभावशाली बनाएंगे।
परियोजना में नागर शैली की पहचान मानी जाने वाली सीढ़ीदार पिरामिडनुमा छत और शिखर को भी प्रमुखता दी गई है। द्वारों के ऊपरी हिस्से में नक्काशीदार ब्रैकेटों से सुसज्जित छज्जे बनाए जाएंगे। शीर्ष पर रेखा शैली का शिखर और पारंपरिक कलश स्थापित होगा। ये आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि हरियाली और खुले वातावरण के बीच विकसित होने वाली यह संरचना भविष्य में नैमिषारण्य की नई पहचान बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगी। इससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में ये वैदिक तोरण द्वार नैमिषारण्य को देश-दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों की श्रेणी में और मजबूत पहचान दिलाएंगे।






