Uttarakhand

23 साल पुराना मामला फिर गरमाया, जेनी ने हरक सिंह रावत पर लगाया दुष्कर्म का आरोप

इंदिरा देवड़ी मीडिया से हुईं रूबरू, सीएम धामी से लगाई गुहार, कहा- इंसाफ नहीं मिला तो देहरादून से नहीं जाऊंगी, CBI व DNA टेस्ट की मांग, एसएसपी ने जांच के दिए आदेश, 2003 का है मामला

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 7 नवंबर 2026:

उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव 2027 के बीच 23 साल पुराना मामला फिर उभर कर सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है। देहरादून पहुंची जेनी ने मीडिया से बातचीत में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का नाम लेते हुए मामले की दोबारा जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की दोबारा सीबीआई जांच होनी चाहिए। साथ ही DNA टेस्ट की भी मांग की। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने डोईवाला की सीओ वंदना वर्मा को पूरे प्रकरण की जांच कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि साल 2003 में सामने आए इस प्रकरण में जेनी ने तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय मामला सीबीआई तक पहुंचा था और DNA जांच भी कराई गई थी। हरक सिंह रावत लगातार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं और जांच में क्लीन चिट मिलने की बात कहते रहे हैं। करीब 23 साल बाद सामने आईं जैनी उर्फ इंदिरा देवड़ी ने अब खुलकर अपनी बात रखी है। 2003 में तिवारी सरकार के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को जैनी के आरोप के बाद इस्तीफा देना पड़ गया था। जेनी ने सीएम धामी से इंसाफ की गुहार लगाते हुए कहा कि अगर इंसाफ नहीं मिला तो वह देहरादून छोड़कर नहीं जाएंगी। जैनी ने डीजीपी को एक पत्र भी सौंपा है।

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सीबीआई सिर्फ एक बार मिलने आई थी

जैनी ने पुरानी जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीबीआई की टीम उनसे सिर्फ एक बार मिलने आई थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय वह बेहद परेशान थीं और उन्हें हिंदी भी ठीक से समझ नहीं आती थी। कहा कि मुझसे पूछताछ नहीं की। मेरे को हिंदी नहीं आती थी। नब्बे प्रतिशत मुझे समझ में नहीं आती थी।

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डीएनए टेस्ट कैसे हुआ, समझ नहीं आता

डीएनए टेस्ट को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए। कहा कि उनके बेटे का सैंपल लेने के लिए कोई नहीं आया, फिर टेस्ट कैसे हो गया, यह उनकी समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा आज 23 साल का है। मुझे बस यही इंसाफ चाहिए की दोबारा से सीबीआई जांच हो, दोबारा से डीएनए टेस्ट हो। उन्होंने कहा कि उन्हें और कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ बेटे को नाम चाहिए।

इंसाफ नहीं मिला तो देहरादून से नहीं जाऊंगी

उन्होंने कहा कि सीएम से मेरी यही रिक्वेस्ट है, मुझे इंसाफ चाहिए। अगर मुझे इंसाफ नहीं मिला है तो मैं देहरादून से नहीं जाऊंगी। उन्होंने अपने साथ हुए उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय वह नाबालिग थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इतने साल बाद आने का उठाया सवाल

इतने साल बाद सामने आने के सवाल पर जेनी ने कहा कि वह पहले भी आना चाहती थीं, लेकिन डर के कारण नहीं आ सकीं। उन्होंने कहा कि जब भी वो कभी गईं तो मैं वो मिनिस्ट्री पावर में ही रहते थे। कहते थे कि तुम्हारा केस रीओपन होगा ही नहीं। जेनी ने दावा किया कि जब मुख्यमंत्री ने उनका नाम लिया, तब उन्हें हिम्मत मिली। बताया कि वह अपने बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट के लिए दून अस्पताल आई थीं। तीसरी बार देहरादून आने की बात उन्होंने कही।

पहली बार पुलिस ने निकाल दिया था

जैनी ने आरोप लगाया कि पहली बार जब वह देहरादून आई थीं तो उन्हें पुलिस ने बाहर भेज दिया था। उन्होंने कहा कि पहली बार जब आईं थीं तो पुलिस वालों ने मुझे निकाल दिया था और दोबारा न आने को बोला था। उन्होंने कहा कि उस समय वह छोटी थीं और डर गई थीं। उन्हें धमकाया गया था कि अगर वह नहीं गईं तो जेल हो जाएगी और कोई उनकी नहीं सुनेगा। अपनी पृष्ठभूमि के बारे में जैनी ने कहा कि वह मॉडलिंग के लिए देहरादून आई थीं। काम नहीं मिलने पर वह एसटीडी बूथ पर काम करने लगी थीं। फिलहाल सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से उनकी मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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