लखनऊ, 7 मार्च 2026:
यूपी में स्टार्टअप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्किलिंग को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। प्रदेश को नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे ले जाने के लिए सरकार स्टार्टअप नीति और ‘एआई प्रज्ञा’ प्रोग्राम के माध्यम से बड़े स्तर पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में एआई और डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में करीब 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए। इससे उन्हें रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिल सकें।
सरकार की पहल का असर प्रदेश के प्रमुख शहरों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कानपुर, लखनऊ, नोएडा और वाराणसी जैसे शहर तेजी से स्टार्टअप गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। इससे न केवल युवा उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि एमएसएमई क्षेत्र को भी नई ऊर्जा मिल रही है। नवाचार और तकनीक आधारित कारोबार से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की लगभग 400 यूनिट्स सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य प्रदेश में 100 से अधिक स्टार्टअप इन्क्यूबेटर विकसित करने का है। इन इन्क्यूबेटरों के माध्यम से युवाओं को अपने नवाचार और तकनीकी विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, संसाधन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही है। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों के सहयोग से युवाओं को आधुनिक डिजिटल स्किल्स और एआई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे वे बदलती तकनीकी दुनिया के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
इसी के साथ प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र भी तेजी से विस्तार कर रहा है। देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में करीब 65 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ यूपी एक बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर को भी नई मजबूती मिल रही है।
भविष्य की तकनीकों से युवाओं को जोड़ने के लिए प्रदेश के 49 आईटीआई संस्थानों में एआई लैब स्थापित की जा रही हैं। इन लैब्स में छात्रों को एआई, डेटा एनालिटिक्स और उन्नत डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईटी और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते निवेश का असर निर्यात पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश से आईटी-आईटीईएस क्षेत्र का निर्यात 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। यह यूपी को तेजी से उभरते डिजिटल और तकनीकी नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।






