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वोटर लिस्ट में धांधली का आरोप : अखिलेश बोले… फॉर्म-7 के जरिए PDA समाज के वोट काटने की साजिश

समाजवादी पार्टी के मुखिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा के साथ चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा, कहा कि आयोग को अपनी इमारत पर भाजपा का झंडा लगा लेना चाहिए

लखनऊ, 3 फरवरी 2026:

यूपी की मतदाता सूची को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया एवं पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को लखनऊ स्थित सपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भाजपा फॉर्म-7 के माध्यम से बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में धांधली करने की तैयारी कर रही है। अखिलेश ने दावा किया कि इस संबंध में उनके पास पुख्ता सबूत मौजूद हैं।

अखिलेश ने कहा कि उन्हें सबसे पहले सीतापुर से यह जानकारी मिली कि किस विधानसभा में किन मतदाताओं के नाम काटे जाने हैं। इसकी जानकारी भाजपा नेताओं को पहले से दे दी गई है। इसी के आधार पर नया फंडा अपनाकर फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची से नाम हटवाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें खास तौर पर मुस्लिम समुदाय और PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

सपा अध्यक्ष ने विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी आड़ में भाजपा चुनाव से पहले विपक्षी वोटरों को कमजोर करने की साजिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि अब तक जमा किए गए सभी फॉर्म-7 को रद्द किया जाए और जो भी फॉर्म भरे गए हैं उनकी निष्पक्ष और गहन जांच हो। अखिलेश यादव ने सुझाव दिया कि इस पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया जाए ताकि किसी भी तरह की धांधली को पकड़ा जा सके।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वोट सबसे बड़ा अधिकार है और इसके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अखिलेश ने तीखे शब्दों में कहा कि अगर यही हाल रहा तो चुनाव आयोग को अपनी इमारत पर भाजपा का झंडा लगा लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा में हताशा है जो अब कमीशनबाजी, आपसी लड़ाई और वोट कटवाने की साजिशों के रूप में सामने आ रही है।

अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि PDA प्रहरी हर बूथ पर सतर्क रहें और यह सुनिश्चित करें कि एक भी वोट न कटे और न ही घटे। उन्होंने कहा कि अपना वोट बढ़ाइए, अपना भविष्य बचाइए, क्योंकि संविधान और लोकतंत्र दोनों खतरे में हैं।

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