देहरादून, 6 जनवरी 2026:
अंकिता भंडारी हत्याकांड में बिना वजह नाम जोड़े जाने से नाराज़ भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने देहरादून के डालनवाला थाने में खुद को बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है।
दुष्यंत गौतम की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में पूर्व विधायक सुरेश राठौर, उर्मिला सनावर, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कुछ अज्ञात लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। उनका कहना है कि बिना किसी ठोस सबूत के सार्वजनिक मंचों और बयानों में उनका नाम घसीटा गया, जिससे उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा।
घटना के दिन हरिद्वार में मौजूद होने के आरोप से किया इनकार
दुष्यंत गौतम ने साफ कहा है कि घटना के दिन या उसके आसपास वे हरिद्वार में मौजूद ही नहीं थे। इसके बावजूद राजनीतिक फायदे के लिए उन्हें इस संवेदनशील मामले से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि अंकिता बेटी समान थीं और वे ऐसे किसी कृत्य की कल्पना भी नहीं कर सकते।

मानहानि और जांच प्रभावित करने का आरोप
शिकायत में दुष्यंत गौतम ने इसे सीधी मानहानि बताया है। साथ ही कहा कि इस तरह के आरोप न सिर्फ उनकी छवि खराब करते हैं, बल्कि न्याय प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की कोशिश हैं। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली हाई कोर्ट में भी दी शिकायत
एफआईआर के साथ-साथ दुष्यंत गौतम ने दिल्ली हाई कोर्ट में भी शिकायत दर्ज कराई है। इसमें आरोप लगाने वाले व्यक्तियों और संगठनों पर रोक लगाने और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। उनका कहना है कि अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश और देशभर में पहले से ही माहौल संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में बिना प्रमाण किसी का नाम उछालना ठीक नहीं है।






