लखनऊ, 10 जनवरी 2026:
यूपी तेजी से देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस क्रम में अशोक लीलैंड के नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शुभारंभ राज्य के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह परियोजना न केवल आधुनिक औद्योगिक प्रगति का प्रतीक है बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के व्यापक अवसर भी लेकर आई है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अशोक लीलैंड का यह प्लांट प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराएगा। प्लांट में सीधे तौर पर लगभग 1,000 लोगों को रोजगार मिलेगा जबकि इससे जुड़े सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स, सर्विस सेक्टर और एमएसएमई इकाइयों के माध्यम से 2,000 से अधिक अतिरिक्त रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस प्रकार यह परियोजना हजारों परिवारों की आजीविका से सीधे जुड़ने जा रही है।

इस निवेश की एक और महत्वपूर्ण विशेषता राज्य सरकार और अशोक लीलैंड के बीच प्रस्तावित एमओयू है। इसके तहत हर वर्ष प्रदेश के लगभग 10,000 युवाओं को स्किल डेवलपमेंट से जोड़ा जाएगा। इससे युवाओं को आधुनिक औद्योगिक प्रशिक्षण, नई तकनीकों की जानकारी और व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। उन्हें भविष्य के उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के लिए तैयार करेगा।
सीएम योगी के नेतृत्व में बीते लगभग नौ वर्षों में प्रदेश ने निवेश और उद्योग के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है। राज्य सरकार की निवेश आधारित नीतियों के चलते अब तक 60 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार की गारंटी दी जा चुकी है। यह स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश में निवेश अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है बल्कि धरातल पर उतरकर रोजगार सृजन का माध्यम बन रहा है।
श्रम विभाग के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। मार्च 2016 से 26 दिसंबर 2025 तक प्रदेश में 30,219 नई फैक्ट्रियां पंजीकृत हुई हैं। इनके माध्यम से 3 करोड़ 63 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। इसके अलावा विशेष आर्थिक क्षेत्रों में 96 इकाइयां पंजीकृत की गई हैं। इन्वेस्ट यूपी के सारथी पोर्टल पर लगभग 23,000 एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जिनसे करीब 90 लाख रोजगार सृजन की संभावना जताई गई है।
अशोक लीलैंड का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट प्रदेश को ऑटोमोबाइल और कमर्शियल वाहन निर्माण के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। इसके संचालन से स्थानीय युवाओं को तकनीकी ज्ञान, मशीनरी संचालन, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और सप्लाई चेन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय छोटे उद्योगों, परिवहन सेवाओं और पार्ट्स निर्माण इकाइयों को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। इससे समग्र रूप से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।






