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राम मंदिर निर्माण के बाद बदली अयोध्या की तस्वीर : रामनगरी की आर्थिक गतिविधियों में अभूतपूर्व उछाल

आईआईएम लखनऊ की केस स्टडी ने साबित किया प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में पर्यटन, निवेश, रोजगार और राजस्व में हुई व्यापक वृद्धि

लखनऊ, 17 फरवरी 2026:

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ को शैक्षणिक समर्थन मिल गया है। लखनऊ स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की ताजा अध्ययन रिपोर्ट इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या बताती है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद आर्थिक गतिविधियों में अभूतपूर्व उछाल आया है। रिपोर्ट के मुताबिक धार्मिक अवसंरचना को सुविचारित नीति और मजबूत प्रशासनिक समन्वय से जोड़ा जाए तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए शक्तिशाली उत्प्रेरक बन सकती है।

अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। पहले अयोध्या मुख्यतः एक पारंपरिक तीर्थनगर था जहां आगंतुकों की संख्या सीमित, स्थानीय बाजार छोटे पैमाने पर संचालित और रोजगार के अवसर कम थे। कनेक्टिविटी की कमी के चलते युवाओं का पलायन आम बात थी। पर्यटन से होने वाला राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था में खास योगदान नहीं दे पाता था और रियल एस्टेट भी ठहराव की स्थिति में था।

जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद तस्वीर तेजी से बदली। रिपोर्ट के अनुसार पहले छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे जिससे बाजार, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्र में नई जान आ गई। अब सालाना 5-6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है। अयोध्या में लगभग ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में चल रही हैं। इनका असर केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं बल्कि निवेश और सेवाक्षेत्र तक फैल चुका है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर शहर को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

पर्यटन के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय ₹4 लाख करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान है जिसमें अयोध्या की भूमिका अहम होगी। कर राजस्व ₹20,000–25,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। आतिथ्य, निर्माण, परिवहन और सेवाक्षेत्र में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़े हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के मुताबिक मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में एक लाख करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रही। प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, ट्रैवल और स्थानीय कारोबार को नई रफ्तार मिली है।

शहर में 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे खुले हैं जबकि ताज होटल्स, मैरियट इंटरनेशनल और विंडहैम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स जैसी अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाएं विस्तार की योजना बना रही हैं। ऑनलाइन बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग बढ़ने से कारीगरों और उत्पादकों को सीधा लाभ मिला है। करीब 6,000 MSMEs की स्थापना या वापसी हुई है। अगले 4-5 वर्षों में 1.2 लाख प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने का अनुमान है। छोटे दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंच गई है, जबकि मंदिर क्षेत्र के आसपास संपत्ति मूल्यों में कई गुना उछाल देखा गया है।

आईआईएम की रिपोर्ट के निष्कर्ष के मुताबिक अयोध्या अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों का मजबूत हब बन चुकी है। धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल यदि दीर्घकालिक दृष्टि और निवेश के साथ लागू हो तो वह पर्यटन, रोजगार और निजी पूंजी को गति देकर बहुस्तरीय आर्थिक बदलाव ला सकता है। अयोध्या इसका जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है।

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