Lucknow City

बिकाऊ नेताओं को बहुजन समाज नहीं करेगा माफ, मायावती का सियासी अल्टीमेटम, कार्यकर्ताओं को दी ये सलाह

लखनऊ स्थित कार्यालय में देशभर से आए कार्यकर्ताओं से बसपा प्रमुख ने तन, मन और धन से पार्टी को मजबूत करने का किया आह्वान, विरोधी दलों पर साधा निशाना

लखनऊ, 22 फरवरी 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में माल एवेन्यू स्थित बसपा कार्यालय में रविवार को देशभर से आए कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी सुप्रीमो एवं पूर्व सीएम मायावती ने विरोधियों और पार्टी छोड़ चुके नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग थोड़े से स्वार्थ के लिए बिक गए हैं, ऐसे बिकाऊ और गुलाम मानसिकता के लोगों को बहुजन समाज कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि जो लोग बसपा के कारण आगे बढ़े, वे अगर पार्टी के नहीं हुए तो समाज के कैसे होंगे।

बैठक में 19 दिसंबर को दिए गए दिशा-निर्देशों की राज्यवार प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गई। मायावती ने कार्यकर्ताओं से तन, मन और धन से पार्टी को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि बसपा बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों की साठगांठ से दूर रहकर अपने कार्यकर्ताओं की मेहनत की कमाई पर निर्भर है। उन्होंने चुनावी बॉन्ड और ट्रस्ट के जरिए मिलने वाले चंदों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्थाएं राजनीति को संदिग्ध बनाती हैं। बसपा का रास्ता पाक-साफ और संविधान के कल्याणकारी उद्देश्यों के अनुरूप है।

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मायावती ने विरोधी दलों और उनकी सरकारों पर गरीब, किसान और बहुजन विरोधी नीतियां अपनाने, भ्रष्टाचार में लिप्त रहने और कथनी-करनी में भारी अंतर का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसी वजह से इन दलों की विश्वसनीयता तेजी से गिर रही है। ऐसे माहौल में यूपी में बसपा की चार सरकारों के दौरान लागू किए गए सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय और कानून के बेहतर राज के अनुभवों के बल पर पार्टी एक बार फिर लोगों की नई उम्मीद बनकर उभर रही है, जिससे जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

उन्होंने अम्बेडकरवादियों से आह्वान किया कि वे उनके नेतृत्व में सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के मिशन को आगे बढ़ाएं। तीन बार गठबंधन सरकार और एक बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर हासिल की गई उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बहुजन समाज को शोषित से शासक वर्ग बनाने का अभियान हर हाल में जारी रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर बोलते हुए उन्होंने खासकर अमेरिका के साथ प्रस्तावित डील को लेकर उभरी चिंताओं का संज्ञान लिया। मायावती ने कहा कि ‘फर्स्ट’ बनने की कट-थ्रोट प्रतिस्पर्धा ने शोषणकारी वैश्विक व्यवस्था ने और संकट में डाला है। ऐसे में केंद्र सरकार के सामने किसानों और बहुजनों के हितों की रक्षा की बड़ी चुनौती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारत ने अपनी शर्तों पर सौदे किए हैं, तो यह केवल दावा नहीं बल्कि हकीकत होनी चाहिए।

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